पोर्ट ब्लेयर में कृषि नवाचार और सोलर पहल से रूबरू हुआ हिमाचल का मीडिया दल
शिमला, 03 मार्च (हि.स.)। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अध्ययन दौरे पर गए हिमाचल प्रदेश के पत्रकारों के दल ने अपने दौरे के अंतिम दिन पोर्ट ब्लेयर में सेंट्रल आइलैंड एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट और एक सोलर पार्क का भ्रमण किया। इस कार्यक्रम का आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) शिमला की ओर से किया गया था।
पत्रकारों को विजयपुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) स्थित सीआईएआरआई में संस्थान के कामकाज और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। वर्ष 1978 में स्थापित यह संस्थान देश का एकमात्र राष्ट्रीय केंद्र है, जो विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र पर कृषि अनुसंधान करता है। संस्थान अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों में काम कर रहा है।
संस्थान के निदेशक डॉ. जयसुंदर ने मीडिया दल को बताया कि सीआईएआरआई अब तक 45 उच्च उपज वाली फसल किस्में विकसित कर चुका है। इनमें नारियल, चावल, दालें, नोनी, शकरकंद, पत्तेदार सब्जियां, बैंगन और मशरूम जैसी फसलें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्र को समर्पित 148 नई फसल किस्मों में सीआईएआरआई की सात प्रमुख किस्में भी शामिल थीं।
डॉ. जयसुंदर ने बताया कि संस्थान ने छोटे द्वीपीय खेतों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम मॉडल विकसित किए हैं। ये मॉडल नारियल आधारित प्लांटेशन में फसल, पशुधन, मत्स्य पालन और बागवानी को एक साथ जोड़ते हैं। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है, अपशिष्ट का पुनर्चक्रण बढ़ा है और बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अब तक 25 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सीआईएआरआई विकसित भारत @2047 के विजन के तहत जीनोमिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, डिजिटल कृषि और जलवायु-स्मार्ट प्रणालियों पर विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान अंडमान-निकोबार को उष्णकटिबंधीय द्वीप कृषि का वैश्विक मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
दौरे के दौरान पत्रकारों ने द्वीपों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयास भी देखे। एनएलसी इंडिया के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पंडियाराजन ने बताया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत चलाई जा रही सौर परियोजनाएं द्वीपों को हरित ऊर्जा की ओर ले जा रही हैं और महंगे डीज़ल ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कई सौर ऊर्जा परियोजनाएं चल रही हैं और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना पर भी तेजी से काम हो रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

