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हिमाचल में भाजपा को मिला स्थानीय चुनावों का बड़ा बूस्टर, जिला परिषद में 10 जिलों में बढ़त, कांग्रेस सिर्फ दो में आगे

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हिमाचल में भाजपा को मिला स्थानीय चुनावों का बड़ा बूस्टर, जिला परिषद में 10 जिलों में बढ़त, कांग्रेस सिर्फ दो में आगे


शिमला, 02 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए झटका हैं। चार नगर निगमों में से तीन पर भाजपा के कब्जे के बाद अब जिला परिषद चुनावों में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने अधिकांश जिलों में बढ़त बनाकर पार्टी को बड़ा राजनीतिक संबल दिया है।

जिला परिषद चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं लड़े गए थे, लेकिन भाजपा ने पहली बार अपने समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी कर खुलकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। नतीजों में पार्टी की यह रणनीति सफल होती दिखाई दे रही है।

प्रदेश की 250 जिला परिषद सीटों में से 144 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी केवल 59 सीटें जीत पाए हैं। करीब 47 सीटों पर निर्दलीय और अन्य उम्मीदवार विजयी रहे हैं।

ये नतीजे इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे पहले नगर निगम चुनावों में मंडी, धर्मशाला और सोलन में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर नगर निगम अपने खाते में डाल सकी थी।

12 में से 10 जिलों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की बढ़त

जिला परिषद चुनावों के परिणामों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार 12 में से 10 जिलों में बढ़त बनाते नजर आ रहे हैं।

मंडी जिले की 36 सीटों में से 25 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर एकतरफा बढ़त बनाई है। हमीरपुर में 19 में से 15 सीटें भाजपा समर्थित प्रत्याशियों के खाते में गई हैं।

ऊना की 17 सीटों में से 11, बिलासपुर की 14 में से 9, कुल्लू की 14 में से 9 और किन्नौर की 10 में से 8 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे हैं।

सोलन में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 10 सीटें जीती हैं जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को 5 सीटों पर सफलता मिली। सिरमौर की अब तक घोषित 14 सीटों में से 11 पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजयी हुए हैं।

इसी तरह भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को कांगड़ा और शिमला में भी कांग्रेस की तुलना में अधिक सीटें मिली हैं। कांगड़ा की 54 सीटों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार 24 सीटें जीतने में सफल रहे, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को 13 सीटें मिलीं। यहां 17 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

शिमला जिला परिषद में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने 11 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को 10 सीटों पर सफलता मिली है। चार सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई हैं।

कांग्रेस केवल दो जिलों में आगे

इन चुनावों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार केवल चंबा और लाहौल-स्पीति में बढ़त बनाने में सफल रहे हैं।

चंबा की 15 सीटों में से 10 पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को 5 सीटें मिलीं।

लाहौल-स्पीति की 9 सीटों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने 4 सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को 3 सीटों पर सफलता मिली। यहां दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी हुए हैं, जिससे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

कांगड़ा और शिमला में निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी

प्रदेश के दो सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण जिलों कांगड़ा और शिमला में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। कांगड़ा में 17 और शिमला में 4 निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आए हैं। ऐसे में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में सत्ता की चाबी इन्हीं निर्दलीयों के हाथ में रहेगी। दोनों प्रमुख दलों की नजर अब इन निर्वाचित सदस्यों पर टिकी हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा