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हिमाचल के विद्यार्थियों के लिए जापान में खुले तकनीकी शिक्षा और शोध सहयोग के नए रास्ते

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हिमाचल के विद्यार्थियों के लिए जापान में खुले तकनीकी शिक्षा और शोध सहयोग के नए रास्ते


शिमला, 09 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में जापान के टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का दौरा किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुसंधान और विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर कार्यक्रमों की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

जापान के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण पर गए हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में आयोजित एक सेमिनार में भी हिस्सा लिया। विद्यार्थियों को जापान की उन्नत शिक्षा व्यवस्था, अनुसंधान, नवाचार और नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान विद्यार्थियों को जापान के शैक्षणिक और तकनीकी वातावरण को करीब से समझने का अवसर मिला।

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में जापान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग की नई संभावनाएं तलाश रहा है। उन्होंने नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में मजबूत साझेदारी से उपलब्ध क्षमताओं का बेहतर उपयोग होगा और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए नई तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी।

धर्माणी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने और अपने ज्ञान तथा कौशल को बढ़ाने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और अनुसंधान क्षमता से विद्यार्थियों को सीखने का अवसर मिल रहा है। यह पहल तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हिमाचल के युवाओं को तेजी से बदल रहे वैश्विक तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयार करना है। इसके लिए विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और आधुनिक कौशल से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान के विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग से प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक शैक्षणिक और तकनीकी वातावरण को समझने का अवसर मिलेगा।

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने जापान के साप्पोरो स्थित होक्काइडो यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज फॉर सस्टेनेबल फूड, हेल्थ एंड मैटेरियल्स’ में मुख्य अतिथि के रूप में भी हिस्सा लिया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए धर्माणी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी, सतत कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, उन्नत सामग्री, अनुसंधान और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक और पारिस्थितिक परिस्थितियों को देखते हुए सतत प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, कृषि एवं बागवानी और जल संसाधनों को देखते हुए ऐसी तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, जो विकास को गति देने के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद करें।

धर्माणी ने कहा कि भारत के प्रतिभाशाली और कुशल युवाओं तथा जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और अनुसंधान क्षमता के बीच बेहतर समन्वय से भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, उद्योगों, विद्यार्थियों और सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा