home page

हिमाचल हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में उपायुक्त को 5 फीसदी आरक्षण की शक्ति पर लगाई रोक

 | 
हिमाचल हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में उपायुक्त को 5 फीसदी आरक्षण की शक्ति पर लगाई रोक


शिमला, 06 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में जिलाधीशों यानी उपायुक्तों (डीसी) को भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की दी गई शक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किसी जिले में आरक्षण रोस्टर जारी किया गया है, तो उस रोस्टर पर भी फिलहाल रोक रहेगी।

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि जिलाधीशों को दी गई यह शक्ति संविधान के अनुरूप नहीं लगती। अदालत ने कहा कि संविधान में भौगोलिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है, इसलिए इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगाना जरूरी है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायती राज संस्थाओं के लिए अधिकांश आरक्षण रोस्टर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने यह भी कहा कि चुनाव नियम बनाने के अधिकार का उपयोग करते हुए यह शक्तियां जिलाधीशों को दी गई थीं। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों से सहमति जताते हुए 30 मार्च को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगा दी, जिसके तहत जिलाधीशों को भौगोलिक आधार पर 5 प्रतिशत सीटों के आरक्षण रोस्टर में बदलाव करने की शक्ति दी गई थी।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिन चुनाव क्षेत्रों में जिलाधीशों ने इस शक्ति का उपयोग करते हुए भौगोलिक आधार पर आरक्षण रोस्टर जारी किया है, वहां नया रोस्टर फिर से जारी किया जाए। इसके लिए अदालत ने 7 अप्रैल शाम 5 बजे तक की समय-सीमा तय की है।

यह याचिका शिमला जिले की ठियोग तहसील की ग्राम पंचायत घोड़ना के पूर्व प्रधान विकेश ज़िंटा और अन्य लोगों की ओर से दायर की गई थी। याचिका में सरकार द्वारा जिलाधीशों को दी गई इस शक्ति को संविधान के खिलाफ बताया गया था।

इससे पहले सुबह इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ के समक्ष हुई थी। उस खंडपीठ ने इस जनहित याचिका को उन मामलों की सुनवाई कर रही खंडपीठ के पास भेज दिया था, जहां सरकार की संबंधित अधिसूचनाओं को असंवैधानिक ठहराने की मांग से जुड़े मामले पहले से लंबित हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा