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सुक्खू सरकार ने तबादला नीति के नियम किए सख्त, दुर्गम क्षेत्रों में पूरा करना होगा तीन साल का कार्यकाल

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सुक्खू सरकार ने तबादला नीति के नियम किए सख्त, दुर्गम क्षेत्रों में पूरा करना होगा तीन साल का कार्यकाल


शिमला, 29 जुलाई (हि.स.)। सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से जुड़ी व्यवस्था में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कठिन, जनजातीय, हार्ड और अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात अधिकारी और कर्मचारी अब निर्धारित कार्यकाल पूरा किए बिना वहां से नहीं हट सकेंगे। कार्मिक विभाग ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) के पैरा 16.1 में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू की है। सरकार का कहना है कि पुराने प्रावधानों को लागू करने में कई तरह की अस्पष्टताएं सामने आ रही थीं। कर्मचारियों के पांच पसंदीदा स्थानों के विकल्प वाले प्रावधान को लेकर भी भ्रम की स्थिति बन रही थी, जबकि तबादले प्रशासनिक आवश्यकता और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। इसी कारण सरकार ने नियमों को और स्पष्ट किया है।

तीन साल का मतलब होगा दो सर्दियां और तीन गर्मियां, छुट्टी का समय नहीं जुड़ेगा

संशोधित नियमों के अनुसार कठिन, जनजातीय, हार्ड और अति दुर्गम क्षेत्रों में सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष रहेगा। सरकार ने पहली बार स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तीन वर्ष का मतलब उस क्षेत्र में दो सर्दियां और तीन गर्मियां वास्तव में पूरी करना होगा। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी लंबी छुट्टी पर चला जाता है या किसी भी कारण से लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो उस अवधि को कार्यकाल में नहीं जोड़ा जाएगा। कर्मचारी को लौटने के बाद उतनी ही अतिरिक्त अवधि उसी क्षेत्र में सेवा देनी होगी। सरकार का कहना है कि कई कर्मचारी कठिन क्षेत्रों में तैनाती से बचने की कोशिश करते हैं या चिकित्सा अवकाश और अन्य कारणों से लंबे समय तक ड्यूटी से दूर रहते हैं। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी आवश्यक सरकारी सेवाएं प्रभावित होती हैं। किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा के पांगी क्षेत्र और चंबा, कुल्लू, शिमला, मंडी तथा सिरमौर के दूरदराज इलाकों में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी की समस्या सामने आती रही है, क्योंकि कई पद खाली रह जाते हैं या कर्मचारी अपने तैनाती स्थल से लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं।

अतिरिक्त कार्यभार का नहीं मिलेगा लाभ, नियमित तैनाती ही मानी जाएगी सेवा

सरकार ने अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले अधिकारियों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यदि कोई अधिकारी किसी कठिन, जनजातीय, हार्ड या अति दुर्गम क्षेत्र में केवल अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहा है और उसकी वहां नियमित नियुक्ति या तैनाती नहीं है, तो उस अवधि को उस क्षेत्र में दी गई सेवा नहीं माना जाएगा। ऐसी अवधि को निर्धारित कार्यकाल में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी को तबादला नीति के तहत मिलने वाली रियायत, वरीयता, प्रोत्साहन या किसी अन्य लाभ का अधिकार भी नहीं मिलेगा।

55 वर्ष से अधिक आयु वालों को राहत, पदोन्नति के मामलों में छूट नहीं

संशोधित नीति में 55 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। सरकार ने कहा है कि जहां तक संभव होगा, 55 वर्ष से अधिक आयु वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को कठिन, जनजातीय, हार्ड और अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जाएगा। हालांकि पदोन्नति के मामलों में यह छूट लागू नहीं होगी और पदोन्नति के कारण होने वाली तैनाती पर यह प्रावधान प्रभावी नहीं रहेगा। कार्मिक विभाग ने जारी कार्यालय ज्ञापन में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य संबंधित संस्थानों को संशोधित प्रावधानों की जानकारी देकर उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा