हिमाचल में 10 में से 5 कॉलेज फिर खुले, सुक्खू सरकार ने बदला फैसला
शिमला, 23 जून (हि.स.)। कम छात्र संख्या के आधार पर 10 सरकारी डिग्री कॉलेजों में नए दाखिले रोकने और उन्हें बड़े कॉलेजों में समायोजित करने का फैसला लेने वाली हिमाचल प्रदेश की सूक्खु सरकार ने अब अपने ही निर्णय में आंशिक बदलाव करती नजर आ रही है। फैसले को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में विरोध के बीच राज्य सरकार ने अब तक बंद किए गए 10 कॉलेजों में से 5 कॉलेजों को बहाल कर दिया है।
उच्च शिक्षा विभाग ने मंडी जिले के आर्यभट्ट राजकीय डिग्री कॉलेज संधोल और राजकीय डिग्री कॉलेज कोटली के विलय संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही शिमला जिले के राजकीय डिग्री कॉलेज ननखड़ी को भी राहत मिली है। इससे पहले सरकार कांगड़ा जिले के राजकीय डिग्री कॉलेज मुल्थान और शिमला जिले के राजकीय डिग्री कॉलेज कुपवी को बंद करने की अधिसूचना भी वापस ले चुकी है।
कम छात्रों वाले 10 कॉलेजों पर चली थी कैंची
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और संसाधनों के बेहतर उपयोग का हवाला देते हुए सरकार ने जून की शुरुआत में उन 10 सरकारी महाविद्यालयों में नए प्रवेश रोकने का फैसला लिया था, जहां छात्र संख्या 75 से कम थी। इनमें टिक्कर (8 छात्र), भलेई (8), कुकुमसेरी (40), कुपवी (46), संधोल (47), कोटली (50), मुल्थान (59), ननखड़ी (59), जैनगर (61) और रोहाट (70) शामिल थे। इन संस्थानों में कुल 448 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सरकार ने तय किया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन कॉलेजों में नए दाखिले नहीं होंगे और विद्यार्थियों को संबंधित बड़े कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा। नौ कॉलेजों को उनके जिला मुख्यालय स्थित सरकारी महाविद्यालयों से जोड़ा जाना था, जबकि लाहौल-स्पीति के राजकीय डिग्री कॉलेज कुकुमसेरी का विलय राजकीय डिग्री कॉलेज कुल्लू के साथ प्रस्तावित किया गया था।
विरोध के बीच आधे फैसले वापस, अब पांच कॉलेज ही बंद
सरकार का तर्क था कि कम छात्र संख्या वाले संस्थानों में संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है। साथ ही प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को स्थानांतरण के कारण आर्थिक बोझ से बचाने के लिए 5 हज़ार रुपये प्रतिमाह वजीफा देने की भी घोषणा की गई थी। लेकिन फैसले के बाद कई इलाकों में स्थानीय लोगों, छात्र संगठनों और विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अपने कुछ निर्णय वापस लिए। अब तक बहाल किए गए कॉलेजों में कुपवी और ननखड़ी (शिमला), मुल्थान (कांगड़ा), संधोल और कोटली (मंडी) शामिल हैं। इसका मतलब है कि जिन 10 कॉलेजों में नए दाखिले रोकने का निर्णय लिया गया था, उनमें से आधे कॉलेजों को राहत मिल चुकी है।
जयराम ठाकुर बोले- कॉलेज बंद नहीं, छात्र संख्या बढ़ाने पर दें ध्यान
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरा है। ननखड़ी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि दूरदराज़ क्षेत्रों के कॉलेज स्थानीय विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख आधार हैं और इन्हें बंद करने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि यदि सरकार कुछ कॉलेजों को दोबारा खोल रही है तो फिर शुरुआती फैसले किन मानकों के आधार पर लिए गए थे। उन्होंने कहा कि छात्र संख्या कम होने पर संस्थानों को बंद करने के बजाय उनमें विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

