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हिमाचल में सी-ग्रेड सेब खरीद की व्यवस्था बदलने की तैयारी, कैबिनेट में जाएगी नई एमआईएस नीति

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हिमाचल में सी-ग्रेड सेब खरीद की व्यवस्था बदलने की तैयारी, कैबिनेट में जाएगी नई एमआईएस नीति


शिमला, 14 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमआईएस) के तहत होने वाली सी-ग्रेड सेब खरीद की व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। नई एमआईएस नीति को मंजूरी के लिए आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसी सीजन से खरीद प्रक्रिया में कई नए प्रावधान लागू होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और वास्तविक बागवानों तक योजना का लाभ पहुंचाना है।

बागवानी विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार एमआईएस के तहत सेब बेचने वाले हर बागवान के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होगी। फार्मर आईडी के बिना सेब की खरीद नहीं की जाएगी। इसके साथ ही एक बागवान एमआईएस के तहत अधिकतम 30 बोरी सी-ग्रेड सेब ही बेच सकेगा। विभाग का मानना है कि इससे फर्जी खरीद, बिचौलियों की भूमिका और दूसरे राज्यों के सेब को हिमाचल के नाम पर बेचने जैसी शिकायतों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

बागवानी विभाग के सचिव सी. पालरासू के अनुसार इस बार खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी की गई है। एमआईएस के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें खरीद का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा। कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारी बिलों का सत्यापन और अनुमोदन करेंगे। इसके बाद भुगतान सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से बागवानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

नई व्यवस्था के तहत पहली बार सभी खरीद केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सेब की खरीद से लेकर उसकी ढुलाई तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। परिवहन में लगी गाड़ियों पर भी नजर रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

प्रस्ताव के अनुसार सेब उत्पादक क्षेत्रों में 20 किलोमीटर के दायरे में खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे बागवानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़े। जिन इलाकों में सड़क सुविधा सीमित है, वहां लिंक रोड तक कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने इन केंद्रों के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पिछले वर्ष करीब 300 अस्थायी कलेक्शन सेंटर बनाए गए थे। इस बार नई व्यवस्था के तहत खरीद केंद्रों को अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की योजना है।

सरकार पहली बार एमआईएस खरीद में कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी भी सुनिश्चित करने जा रही है। विभाग का कहना है कि इससे गुणवत्ता की जांच और पूरी खरीद प्रक्रिया की निगरानी अधिक प्रभावी होगी। हर वर्ष एमआईएस के तहत खरीदे गए सी-ग्रेड सेब के बदले प्रदेश के बागवानों को औसतन करीब 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद योजना का लाभ वास्तविक बागवानों तक पहुंचेगा और एमआईएस प्रणाली पर उनका भरोसा और मजबूत होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा