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बजट प्रावधानों से मजबूत होगी हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री सुक्खू

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बजट प्रावधानों से मजबूत होगी हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री सुक्खू


शिमला, 22 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि वर्ष 2026–27 के राज्य बजट में किए गए प्रावधान प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेंगे और वर्ष 2030 तक आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस गांवों को विकास की मुख्य धुरी बनाकर किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करना है।

मुख्यमंत्री ने बीते शनिवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था।

रविवार को शिमला से जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करना है, जिसमें कृषि और डेयरी को लाभकारी और सम्मानजनक आजीविका के रूप में स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वास्तविक विकास का आकलन समाज के अंतिम व्यक्ति की समृद्धि से होता है और इसी सोच के साथ बजट में ग्रामीण क्षेत्र के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

उनके अनुसार सरकार केवल अनुदान आधारित मॉडल पर निर्भर नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे युवा कृषि और पशुपालन से स्थायी आय अर्जित कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। सरकार ने गाय के दूध का खरीद मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।

इसके साथ ही देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए ए-2 दूध का खरीद मूल्य 100 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे पशुपालकों की आय बढ़ेगी और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जिससे यह राशि सीधे उनके खातों में पहुंचेगी और उन्हें त्वरित आर्थिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है, जबकि मक्की का समर्थन मूल्य 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है।

उन्होंने बताया कि कच्ची हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है और पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार इन फैसलों से नकदी फसलों की ओर किसानों का रुझान बढ़ेगा और ग्रामीण आय में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समस्याओं और सुझावों को सीधे नीति निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य किसान आयोग के गठन की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि यह आयोग कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना’ के तहत एक लाख जरूरतमंद परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्थायी आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा