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होला मोहल्ला: पांवटा साहिब बना राष्ट्रीय आस्था और एकता का केंद्र, कवि सम्मेलन में गूंजा गुरु इतिहास

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नाहन, 04 मार्च (हि.स.)। गुरु की नगरी पांवटा साहिब में 342वां होला मोहल्ला इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर आस्था, संस्कृति और भाईचारे का अद्भुत संगम बनकर उभरा है। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब के विशाल प्रांगण में बीती रात आयोजित भव्य भाव–कवि सम्मेलन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। खुले पंडाल में देर रात तक चली काव्यधारा में देश-विदेश से पहुंचे मुस्लिम, सिख और विभिन्न समुदायों के कवियों ने गुरु इतिहास, वीरता और आध्यात्मिक चेतना पर अपनी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड सहित कई राज्यों से हजारों की संख्या में संगत यहां पहुंची। श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यापक व्यवस्था की गई। शहर के विभिन्न स्थानों पर लंगर सेवा निरंतर जारी है, जहां सेवा भाव से श्रद्धालुओं को भोजन परोसा जा रहा है। पूरी नगरी श्रद्धा और समर्पण के रंग में रंगी दिखाई दे रही है।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हजराजन सिंह, इंचार्ज गुरमीत सिंह और मैनेजर जागीर सिंह ने बताया कि 28 फरवरी से ऐतिहासिक गुरुद्वारा परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी है। उन्होंने बताया कि दसवें पातशाह गुरु गोविंद सिंह ने यहां चार वर्ष व्यतीत किए थे। मान्यता के अनुसार उनके घोड़े का पांव इस भूमि पर टिका, जिसके बाद इस स्थान का नाम पांवटा साहिब पड़ा। यही ऐतिहासिक विरासत आज भी श्रद्धालुओं को यहां खींच लाती है।

कवि सम्मेलन में प्रस्तुत रचनाओं ने जहां गुरु साहिब के त्याग, तप और वीरता को जीवंत किया, वहीं सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी बुलंद किया। मुस्लिम कवियों सहित विभिन्न समुदायों के रचनाकारों ने मंच साझा कर यह साबित किया कि गुरु परंपरा केवल एक धर्म नहीं, बल्कि मानवता की प्रेरणा है।

342वां होला मोहल्ला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव बनकर सामने आया है। पांवटा साहिब से उठी यह भक्ति और एकता की गूंज पूरे देश में संदेश दे रही है कि गुरु की नगरी आज भी प्रेम, सेवा और साहस की जीवंत मिसाल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर