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पार्वती टनल में रिसाव से रैला पंचायत पर मंडराया खतरा : गुमान सिंह

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पार्वती टनल में रिसाव से रैला पंचायत पर मंडराया खतरा : गुमान सिंह


मंडी, 20 सितंबर (हि.स.)। पार्वती जल विद्युत परियोजना फेस-2 की एडिट-5 के नीचे टनल से पानी के रिसाव के बाद रैला पंचायत के पालचरा आरडी-14000 क्षेत्र में कुछ घरों को नुक्सान पहुंचने का मामला सामने आया है।

हिमालया नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने दावा किया है कि टनल में पानी डाले जाने के बाद से रैला पंचायत के विभिन्न गांवों में जमीन में दरारें और रिसाव जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से मामले की तत्काल जांच करवाने की मांग की है।

गुमान सिंह के अनुसार पार्वती जल विद्युत परियोजना फेस-2 के तहत पार्वती नदी के पानी को बरशैणी से टनल के माध्यम से सैंज नदी की ओर मोड़कर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। टनल भाट कंधा क्षेत्र में निकलती है, जबकि इसके नीचे एडिट-5 और उसके नीचे पालचरा क्षेत्र स्थित है। पालचरा के पीछे परियोजना की डंपिंग साइट भी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 की बरसात के दौरान भी डंपिंग साइट के मलबे के कारण क्षेत्र में भूस्खलन हुआ था। जिसमें गांव के दो घरों के तबाह होने का दावा किया गया था।

उनके मुताबिक डंपिंग साइट के नीचे रैला गांव सहित पूरा क्षेत्र बसा हुआ है, इसलिए किसी भी बड़े भूस्खलन की स्थिति में आबादी को गंभीर खतरा हो सकता है।

हिमालया नीति अभियान के संयोजक ने कहा कि पिछले वर्ष परियोजना की टनल में पानी डाले जाने के बाद रैला पंचायत के रैला गांव के अलावा शुलगा, डाहरा, रुंबरा, खड़ोहा, बागीधार और राख सुखल सहित आसपास के क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर जमीन में दरारें दिखाई देने का दावा किया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बरसात के दौरान जीवा और आसपास के गांवों में करीब 15 से 20 घरों को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई थी।

उन्होंने सिउंड क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि पावर हाउस के ऊपर पहाड़ को सीमेंट से पक्का किया गया है। लेकिन परियोजना में पानी आने के बाद पहाड़ के कई हिस्सों से पानी का रिसाव होने लगा है। उनका कहना है कि इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की टीम से पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन करवाया जाना चाहिए।

गुमान सिंह ने कहा कि टनल से पानी रिसने के पीछे निर्माण संबंधी खामियां अथवा भूमिगत भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों का सही आकलन न होना जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, वास्तविक कारण विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। उन्होंने मांग की कि टनल रिसाव के कारणों की तत्काल तकनीकी और भू-वैज्ञानिक जांच करवाई जाए तथा रिसाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि एडिट-5 के नीचे रैला पंचायत के कई गांव ढलानदार और भुरभुरी जमीन वाले क्षेत्र में बसे हैं। ऐसे में पालचरा के पीछे बनी डंपिंग साइट से नीचे बसे इलाकों को संभावित खतरा होने की आशंका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा