राष्ट्र निर्माण और जन चेतना पर आधारित फिल्मों का निर्माण समय की मांग : दीपक दुआ
शिमला, 08 मई (हि.स.)। हिमसिने सोसाइटी-एक सोच द्वारा गेयटी थिएटर शिमला में लघु फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन शुक्रवार को किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक दीपक दुआ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर दीपक दुआ ने कहा कि वर्तमान समय में सिनेमा देखने के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं और दर्शक अपनी पसंद के अनुसार फिल्में चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे व्यक्ति के विचारों और मानसिकता को भी गहराई से प्रभावित करती हैं। जिस प्रकार भोजन शरीर पर प्रभाव डालता है, उसी प्रकार फिल्में मन और मस्तिष्क पर प्रभाव छोड़ती हैं। इसलिए दर्शकों को सोच-समझकर फिल्मों का चयन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज दर्शक ऐसी फिल्मों को पसंद कर रहे हैं जो राष्ट्रभावना और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि धुरंधर जैसी फिल्मों की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनमें स्व और राष्ट्र के प्रति जागरूकता का भाव है। उन्होंने चिंता जताई कि लंबे समय तक ऐसी फिल्में अधिक बनाई जाती रहीं जिन्होंने परिवार और समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का संदेश दिया।
दीपक दुआ ने पांच परिवर्तन विषय के अंतर्गत कुटुंब प्रबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि दर्शकों को ऐसी फिल्मों और वेब सीरीज की तलाश करनी चाहिए जो मनोरंजन के साथ परिवार और समाज के प्रति कर्तव्यबोध भी कराएं। उन्होंने पुरानी चर्चित फिल्म आनंद का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दौर में उस स्तर की संवेदनशील और प्रेरणादायक फिल्में बहुत कम बन रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं को पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि निर्माता वही फिल्में बनाते हैं जिन्हें दर्शक पसंद करते हैं। यदि दर्शक सकारात्मक और मूल्यपरक फिल्मों को अधिक समर्थन देंगे तो ऐसे विषयों पर अधिक फिल्में बनेंगी।
विशिष्ट अतिथि प्रताप समयाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने थिएटर और सिनेमा के माध्यम से प्रदेश का नाम देशभर में रोशन किया है। उन्होंने कहा कि पांच परिवर्तन के अंतर्गत विभिन्न सामाजिक विषयों, प्रसंगों और घटनाओं पर अच्छी लघु फिल्में बनाई जा रही हैं, जिनकी सराहना की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण और जनजागरण से जुड़े विषयों पर और अधिक फिल्में बनाने की आवश्यकता है। ऐसी फिल्में न केवल दर्शकों को पसंद आएंगी, बल्कि परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सहायक सिद्ध होंगी।
प्रताप समयाल ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सम्मानपूर्वक गायन की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सिनेमा और लघु फिल्मों के माध्यम से ऐसे विषयों को सामने लाना चाहिए जो मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन करें और दर्शकों को अपने कर्तव्यों के प्रति प्रेरित करें।
कार्यक्रम में हिम सिने सोसाइटी-एक सोच की अध्यक्ष आरती गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए कुल 28 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। सभी लघु फिल्मों का मूल्यांकन ज्यूरी सदस्य प्रोफेसर शशिकांत और प्रकाश लोहमी द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार नाहन के हर्ष को प्रदान किया गया। द्वितीय स्थान के लिए अभिमन्यु और प्रांशु बांशा का चयन हुआ, जबकि तृतीय पुरस्कार नर्वदा शर्मा, रूपेंद्र ठाकुर और जतिन कुमार को दिया गया। इसके अतिरिक्त “इंसानों का जंगल” लघु फिल्म के लिए ईशान पुंडीर को स्पेशल ज्यूरी अवार्ड प्रदान किया गया।
समारोह में अन्य प्रतिभागियों अनस खान, पूनम चौहान, सुशांत लखनपाल, आर्यन हरनोट, मनवर राणा, धीरेन सिंह, टिंकू, कृतिका कक्कड़, मीनाक्षी पंडित, प्रज्ज्वल शर्मा, प्रिया मिश्रा, राहुल चौहान, रितिक, श्वेता विश्वकर्मा, सौरूष गुलेरिया, सुनील ठाकुर, हर्षित शर्मा और विवेक मोहन को भी सम्मानित किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

