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स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का जताया विरोध

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स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का जताया विरोध


मंडी, 21 जनवरी (हि.स.)। बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में हिमाचल किसान सभा के बैनर तले अधिवेशन एवं प्रदर्शन किया। इसमें भराड़ू जिला परिषद् वार्ड की बल्ह, चल्हारग, कस, भराडू, नौहली, बिहूँ पंचायतों के अलावा साथ लगती नेरघरवासड़ा, मसोली, द्राहल, बुहला भडयाड़ा, पिपली, कुठेहड़ा, द्रुब्बल धार आदि पंचायतों के सैंकड़ों किसानों, महिलाओं, दुकानदारों सेवानिवृत सैनिकों व सेवानिवृत कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर कुशाल भारद्वाज ने कहा कि स्मार्ट मीटर की यह योजना असल में बिजली के वितरण के निजीकरण करने, उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली सबसीडी बंद करने, कर्मचारियों की छंटनी करने तथा पेंशन को बंद करने की दिशा में एक शुरूआत है। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति अधिनियम-1948 और राज्य बिजली बोर्डों को नियंत्रित करने वाले समान अधिनियमों में जिस सामान्य सिद्धांत का पालन किया गया था वह सामजिक, आर्थिक विकास और सामाजिक टैरिफ की अवधारणा पर जोर देना हैं। वर्तमान केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण के लिए तत्पर है, जिसमें बिजली के वितरण को प्राइवेट कंपनियों के हवाले किया जाना है। राज्य बिजली बोर्ड को समाप्त कर अम्बानी-अदानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों को बिजली वितरण का कार्य सौंप दिया जाएगा. इससे लाखों कर्मचारियों कि नौकरी चली जायेगी, पेंशनधारकों की पेंशन खतरे में पड़ जायेगी. बिजली बोर्ड में कोई नौकरी ही नहीं मिलेगी और सबसे बड़ी चोट यह कि उपभोक्ताओं को बहुत महंगी बिजली मिलेगी।

कुशाल भारद्वाज ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार की पूंजीपति परस्त व उपभोक्ता विरोधी स्मार्ट मीटर योजना का विरोध करने के बजाये प्रदेश की कांग्रेस सरकार इसको तेजी से लागू कर रही है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. स्मार्ट मीटर सीधे-सीधे उपभोक्ताओं को लूटने के लिए ही लग रहे है। यदि आज ही स्मार्ट मीटर योजना को रोकने के लिए एकजुट नहीं हुए तो फिर से गरीबों और मध्यम वर्ग के घरों में लैम्प और लालटेन जलाने की नौबत आ जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा