महिला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने पर हाईकोर्ट सख्त, सहायक रजिस्ट्रार को न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण लेने के निर्देश
शिमला, 08 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कानून के प्रावधानों के विपरीत एक महिला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां शिमला को अपनी कानूनी समझ और दक्षता बढ़ाने के लिए दो दिन का प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी एक अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी हैं, इसलिए उनसे कानून की सही जानकारी और सावधानी की अपेक्षा की जाती है।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सहायक रजिस्ट्रार बुद्धि राम ने एक महिला डिफॉल्टर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट यांत्रिक तरीके से जारी कर दिया, जबकि ऐसा करना कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं था। अदालत ने निर्देश दिया कि वह अगले दो सप्ताह के भीतर अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दो दिन हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी शिमला में प्रशिक्षण प्राप्त करें।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अधिकारी की कानूनी जानकारी और कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से दिया गया है और इसका उनके वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि संबंधित अधिकारी ने भू-राजस्व अधिनियम, 1954 की धारा 75-ए के प्रावधानों पर ध्यान दिया होता, तो उन्हें यह स्पष्ट हो जाता कि किसी महिला, नाबालिग, पागल या मंदबुद्धि व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बावजूद बिना इन प्रावधानों पर विचार किए महिला के खिलाफ वारंट जारी कर दिया गया और ढली थाना प्रभारी को 13 अप्रैल 2026 तक उसे लागू करने के निर्देश भी दे दिए गए थे। अदालत ने 13 मार्च 2026 को जारी इस गिरफ्तारी वारंट को निरस्त कर दिया है।
याचिकाकर्ता महिला ने अदालत को बताया कि उनके पति प्रेम सिंह ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड से ऋण लिया था, जिनका 8 अगस्त 2019 को निधन हो गया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति से कोई चल या अचल संपत्ति विरासत में नहीं मिली है। हालांकि वह विधवा के रूप में पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रही हैं और अब बैंक के साथ मिलकर इस मामले का समाधान करना चाहती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

