हिमाचल में कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर हाईकोर्ट का नोटिस, सरकार से 4 हफ्ते में जवाब तलब
शिमला, 30 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के मुकाबले कम महंगाई भत्ता दिए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 4 जून 2026 को होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज ने प्रारंभिक तौर पर राज्य सरकार से पूछा है कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता क्यों नहीं दिया जा रहा।
याचिकाकर्ता शिक्षा विभाग में सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनकी नियुक्ति 28 जनवरी 1998 को लिपिक के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्हें जुलाई 2008 में वरिष्ठ सहायक और जुलाई 2014 में सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति मिली। उनका कहना है कि वर्तमान में महंगाई भत्ते में 15 प्रतिशत का अंतर होने के कारण उन्हें हर महीने करीब 10 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने समय-समय पर महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी जरूर की है, लेकिन यह अब भी केंद्र सरकार के स्तर से कम है। राज्य में फरवरी 2022 में महंगाई भत्ता 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 31 प्रतिशत, अप्रैल 2023 में 34 प्रतिशत, मार्च 2024 में 38 प्रतिशत, अक्तूबर 2024 में 42 प्रतिशत और अक्तूबर 2025 में 45 प्रतिशत किया गया। फिलहाल राज्य के कर्मचारियों को 45 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है, जो 1 जुलाई 2023 से लागू है। वहीं केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जिससे दोनों के बीच 15 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है।
इस अंतर का असर केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है। हिमाचल प्रदेश में करीब 1 लाख 91 हजार कर्मचारी और लगभग 1.71 लाख पेंशनभोगी हैं, जिनका 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित बताया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के दौर में कम भत्ता मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और लंबे समय से इस मांग को उठाया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

