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हिमाचल हाईकोर्ट में महिला कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न कानून पर किया जागरुक

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हिमाचल हाईकोर्ट में महिला कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न कानून पर किया जागरुक


शिमला, 01 अगस्त (हि.स.)।

शिमला, 01 अगस्त। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शनिवार को महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हाईकोर्ट की आंतरिक शिकायत समिति (इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में हाईकोर्ट रजिस्ट्री की महिला कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने विषय विशेषज्ञ के रूप में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने वर्ष 1997 के विशाखा दिशा-निर्देशों और इस विषय पर उच्चतम न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि विशाखा बनाम राजस्थान राज्य मामले में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद इस कानून का रास्ता साफ हुआ।

सामाजिक कार्यकर्ता और विषय विशेषज्ञ सुमित्रा चंदेल ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और यौन उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने महिलाओं को कानून में यौन उत्पीड़न की परिभाषा, उसके दायरे और आंतरिक शिकायत समिति के गठन से जुड़े प्रावधानों की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में शी-बॉक्स पोर्टल के नोडल अधिकारी ने भी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि शी-बॉक्स एक ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन पोर्टल है, जहां कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

उन्होंने पोर्टल के उपयोग और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया भी समझाई।

हाईकोर्ट के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला कर्मचारियों को उनके अधिकारों और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्था के बारे में जागरूक करना था।

कार्यक्रम के माध्यम से महिला कर्मचारियों को कानून और शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी दी गई, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का उपयोग कर सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा