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सर्वोच्च न्यायालय में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों पर लगी अंतिम मुहर, अब निर्णय लागू करे सरकार:डा. बनीता

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सर्वोच्च न्यायालय में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों पर लगी अंतिम मुहर, अब निर्णय लागू करे सरकार:डा. बनीता


मंडी, 29 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ एचजीसीटीए ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिकाओं को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने का स्वागत किया है। एचजीसीटीए ने इसे हिमाचल प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों की ऐतिहासिक एवं निर्णायक जीत बताया है। एचजीसीटीए की प्रदेशाध्यक्ष डा. बनीता सकलानी ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि संविदा सेवा की अवधि को कर्मचारियों के सेवा लाभों से अलग नहीं किया जा सकता।

उन्होंने बताया कि ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य से लेकर अनेक निर्णयों में उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए कि संविदा सेवा की गणना वेतन निर्धारण, वरिष्ठता, पदोन्नति, अर्जित अवकाश, पेंशन तथा अन्य सभी परिणामी सेवा लाभों के लिए अनिवार्य रूप से की जाए।

उन्होंने कहा कि न्यायालयों के इन स्पष्ट निर्देशों का पालन करने के बजाय राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2025 लागू कर कर्मचारियों को न्यायालयों द्वारा दिए गए अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया। यह कानून न्यायिक निर्णयों को निष्प्रभावी बनाने का एक असफल प्रयास सिद्ध हुआ। इस अधिनियम को माननीय उच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया और सरकार को सभी पात्र कर्मचारियों को परिणामी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए। इसके बावजूद राज्य सरकार ने न्यायालय के आदेशों को लागू करने के बजाय सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं माननीय न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को नकारने का आधार नहीं हो सकता। न्यायालय ने ताज मोहम्मद सहित पूर्ववर्ती निर्णयों में स्थापित विधिक सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करते हुए राज्य सरकार की सभी विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज कर दिया।

एचजीसीटीए अध्यक्ष ने कहा कि अब यह विवाद पूर्णतः समाप्त हो चुका है। राज्य सरकार के पास कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को टालने का न कोई कानूनी आधार बचा है और न ही कोई नैतिक औचित्य। सरकार को अब बिना किसी देरी के सभी पात्र कर्मचारियों की संविदा सेवा अवधि को वेतन निर्धारण, वरिष्ठता, पदोन्नति, अर्जित अवकाश, पेंशन तथा अन्य सभी सेवा लाभों के लिए मान्यता प्रदान करनी चाहिए।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी विभागों को तत्काल विस्तृत कार्यान्वयन निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि प्रत्येक पात्र कर्मचारी को न्यायालयों द्वारा स्वीकृत लाभ बिना किसी भेदभाव, विलंब या अनावश्यक मुकदमेबाजी के उपलब्ध हो सकें। कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकार प्राप्त कराने में अब किसी प्रकार की प्रशासनिक या विधिक बाधा शेष नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा