हिमाचल हाईकोर्ट ने एसपी सीटीएस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर लगाई रोक
शिमला, 02 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीटीएस (क्राइम ट्रैकिंग सिस्टम) के एसपी राजेश वर्मा के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने पारित आदेश में केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम 14 के तहत जारी आरोपपत्र के आधार पर आगे की विभागीय कार्यवाही पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला पुलिस विभाग में की गई करीब 250 पदोन्नतियों से जुड़ा है।
मामले के अनुसार एसपी/सीटीएस राजेश वर्मा ने 23 मई 2025 को पुलिस महानिदेशक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि हेड कांस्टेबल से सीटीएस इंस्पेक्टर के पद पर करीब 250 पदोन्नतियां हिमाचल हाईकोर्ट के 27 अप्रैल 2012 के फैसले और वर्ष 2010 के भर्ती एवं पदोन्नति (आर एंड पी) नियमों के विपरीत की गई हैं। शिकायत में कहा गया कि वर्ष 2010 के आर एंड पी नियम हाईकोर्ट के निर्देशों पर तैयार किए गए थे। इन नियमों को राजपत्र में अधिसूचित भी किया गया था और हाईकोर्ट में भी प्रस्तुत किया गया था।
शिकायत में कहा गया कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक ने मामले की जांच के बाद इसे सतर्कता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास मंजूरी के लिए भेजा। इसके बाद फाइल गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास पहुंची और वहां से अगस्त 2025 में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भेजी गई।
याचिका के अनुसार डीजीपी ने शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय करीब 250 पदोन्नतियों को मंजूरी देने की सिफारिश गृह विभाग को भेज दी। साथ ही वर्ष 2010 के आर एंड पी नियमों में संशोधन की भी सिफारिश की।
याचिका में कहा गया कि शिकायत लंबित रहने और उस पर कोई कार्रवाई नहीं होने से आहत होकर राजेश वर्मा ने नवंबर 2025 में हिमाचल हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका दायर की। इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया गया। याचिका में दावा किया गया कि निलंबन का आधार हाईकोर्ट में याचिका दायर करना था। निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अदालत ने 3 जनवरी 2026 को अंतरिम राहत देते हुए उस पर रोक लगा दी।
इसके बाद 27 जनवरी 2026 को राजेश वर्मा को केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम 14 के तहत आरोपपत्र जारी किया गया। इस आरोपपत्र को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। मामले की सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट ने विभागीय कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

