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कुल्लू में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नई अदालत का उद्घाटन, करीब 3,800 मामले लंबित

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कुल्लू में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नई अदालत का उद्घाटन, करीब 3,800 मामले लंबित


शिमला, 18 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया ने शुक्रवार को कुल्लू में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नई अदालत का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा, न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी, न्यायमूर्ति राकेश कैन्थला, न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज, न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और अन्य रजिस्ट्रार, कुल्लू के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और अन्य न्यायिक अधिकारी, जिला बार के सदस्य तथा अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित कुल्लू को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। हिमालय से घिरी यह खूबसूरत घाटी अपनी संस्कृति और परंपराओं के कारण देश-दुनिया के लोगों को आकर्षित करती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता के बीच आम लोगों के जीवन से जुड़े विवाद भी होते हैं, जिनसे दीवानी और आपराधिक मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि कुल्लू जिले में लोगों की बढ़ती आवाजाही का असर न्याय व्यवस्था पर भी पड़ा है। इससे विवाद और अपराध बढ़े हैं, विशेष रूप से मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा दीवानी मामलों की संख्या भी बढ़ी है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि कुल्लू के न्यायिक परिसर में केवल अपीलीय अदालतों के समक्ष करीब 3,800 मामले लंबित हैं।

न्यायमूर्ति संधावालिया ने कहा कि लंबित मामलों की संख्या केवल आंकड़ा नहीं है। हर लंबित मामला किसी व्यक्ति के न्याय और समाधान की प्रतीक्षा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा न्यायिक ढांचा न्याय व्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं था। मामलों का समय पर निपटारा हो और अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए कुल्लू में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नई अदालत की स्थापना जरूरी थी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का उद्घाटन केवल किसी भवन या नए कार्यालय की शुरुआत नहीं है। अदालत इससे कहीं बड़ी संस्था है। ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के लिए धर्म की रक्षा का अर्थ कानून के शासन की रक्षा करना, बिना भय या पक्षपात के निर्णय देना, व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना और समाज के हितों को कायम रखना है। उन्होंने कहा कि नई अदालत लोगों के न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास है।

उन्होंने नई अदालत की जिम्मेदारी संभालने वाले अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अमित मंडयाल को बधाई दी और उनके सफल एवं संतोषजनक कार्यकाल की कामना की। मुख्य न्यायाधीश ने कुल्लू के जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी.सी. राणा के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अदालत की अधिसूचना जारी होने के बाद पी.सी. राणा ने जमीनी स्तर पर अदालत के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि जिले के न्यायिक अधिकारी और बार के सदस्य मिलकर काम करें, जिससे अदालत में कानून का निष्पक्ष रूप से पालन हो, हर व्यक्ति की बात सम्मान के साथ सुनी जाए और न्याय देने में अनावश्यक देरी न हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा