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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में 1 सितंबर से होगी ऑनलाइन उपस्थिति

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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में 1 सितंबर से होगी ऑनलाइन उपस्थिति


शिमला, 03 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1 सितंबर 2026 से शिक्षकों की उपस्थिति पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। यह निर्णय सोमवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में शिक्षा निदेशालय में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। अभी कई स्कूलों में उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज की जा रही है। अब सभी सरकारी स्कूलों में विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से डिजिटल उपस्थिति लागू होगी। स्कूलों का निरीक्षण भी इसी प्रणाली से किया जाएगा। अगले एक सप्ताह में आवश्यक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उपनिदेशकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बैठक में दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर एक वर्ष के लिए अस्थायी शिक्षकों की भर्ती का प्रस्ताव तैयार करने का फैसला भी लिया गया। शिक्षा विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करेगा, जिसे बाद में मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्य में यह व्यवस्था सफल रही है और हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में भी इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने सभी योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, लंबित पदोन्नतियों के शीघ्र निपटारे और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकारी स्कूलों से नीट, जेईई मेन्स और जेईई एडवांस में सफल विद्यार्थियों को प्रदेश सरकार सम्मानित करेगी।

बैठक में शिक्षक पुरस्कारों के लिए नई व्यवस्था की जानकारी भी दी गई। अब स्कूल अपने स्तर पर भी आवेदन कर सकेंगे। जिला प्रशासन, उपमंडल प्रशासन, उपनिदेशक और स्कूल प्रबंधन समितियां भी नाम भेज सकेंगी। चयन में शैक्षणिक नवाचार और विद्यार्थियों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। इस वर्ष जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देने के अतिरिक्त अंक नहीं मिलेंगे। निरीक्षण अब शिक्षा निदेशालय स्तर की समिति करेगी और विद्यार्थियों से शिक्षकों के बारे में ऑनलाइन फीडबैक भी लिया जाएगा। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान में हिमाचल के 11 स्कूल राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए हैं। प्रत्येक स्कूल को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी और संबंधित प्रधानाचार्य एक्सपोजर टूर पर जाएंगे।

समीक्षा बैठक में डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना, डिजिटल लाइब्रेरी और अन्य योजनाओं की भी समीक्षा हुई। चार लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को इस योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण एक प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर दिया जाता है। प्रदेश के 124 पीएम श्री स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी संचालित है और विभाग के अनुसार 91 प्रतिशत विद्यार्थी इसका नियमित उपयोग कर रहे हैं। शिव नाडर फाउंडेशन के साथ हुए समझौते के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के चयनित विद्यार्थियों को छठी से बारहवीं तक आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा