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माधो राय की भव्य जलेब के साथ संपन्न हुआ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव, राज्यपाल ने की शिरकत

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माधो राय की भव्य जलेब के साथ संपन्न हुआ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव, राज्यपाल ने की शिरकत


मंडी, 22 फ़रवरी (हि.स.)। देवताओं का महाकुंभ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव रविवार को माधो राय की तीसरी व अंतिम भव्य जलेब के साथ संपन्न हो गया। इसके साथ ही पिछले आठ दिनों से देव ध्वनि से गुंजायमान रही छोटी काशी मंडी से देवी देवता अपने अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। माधो राय की इस जलेब में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल भी शामिल हुए। उन्होंने इस महोत्सव का विधिवत समापन भी मेला स्थल पड्डल में किया। इससे पहले उन्होंने मंडी का लहरिया साफा धारण करके राज माधव यानी माधो राय मंदिर में पूजा अर्चना की।

इसके उपरांत माधो राय को भी विधिवत पालकी में स्थापित किया गया और फिर यह जलेब यानी शोभायात्रा मंदिर परिसर से आरंभ हुई। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण देवी देवता अपने नाचते गाते हजारों देवलुओं के साथ शामिल हुए। माधो राय मंदिर से चलते हुए यह जलेब शहर के प्राचीन चौहट्टा बाजार, बाबा भूतनाथ मंदिर, भूतनाथ बाजार, पलाखा, समखेतर, मोती बाजार, सेरी बाजार, कालेज रोड़ होते हुए मेला स्थल पड्डल मैदान पहुंची। पड्डल मैदान में कतारबद्ध खड़े अन्य देवी देवताओं के साथ माधो राय का मिलन हुआ तथा अगले साल तक विदाई भी की गई।

इस शोभायात्रा में नाचते गाते सांस्कृतिक दल, पुलिस की टुकड़ियां, माधो राय के घोड़े भी शामिल हुए। राज्यपाल के साथ पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, विधायक चंद्रशेखर, अनिल शर्मा, विनोद कुमार, दलीप चंद व कई अन्य भाजपा के विधायक भी इसमें शामिल हुए। इस शोभायात्रा का नजारा देखते ही बनता था। माधो राय की पालकी के आगे पीछे चलते हुए देवी देवता , नाचते गाते देवलु, रणसिंघों, करनालों, ढोल नगाड़ों, शहनाई व अन्य प्राचीन वाद्य यंत्रों की ध्वनि से किसी देवलोक जैसा नजारा बन गया। इस बार सबसे रोचक यह रहा कि नाचते गाते देवलुओं में युवकों के साथ साथ युवतियां भी बड़ी संख्या में शामिल हुई। इसे देखने के लिए मीलों तक सड़कों के दोनों ओर लोगों की अपार भीड़ उमड़ी थी। कड़ी सुरक्षा के बीच यह शोभायात्रा खुश्गवार मौसम में संपन्न हुई। इससे पहले रविवार सुबह चौहाट्टा की जातरा में सभी देव देवता एक साथ विराजमान हुए। इस दौरान शहर के मध्य भाग चौहट्टा व सेरी बाजार में तिल धरने को जगह नहीं बची।

मेला समिति की ओर से देवी देवताओं को चादरें व नजराना भेंट किया गया। महोत्सव में 200 के लगभग पंजीकृत व इतने ही गैरपंजीकृत देवी देवता अपने हजारों देवलुओं के साथ इस महोत्सव में शामिल हुए। नौ दिन बाद टारना मंदिर परिक्रमा में रहे बड़ा देव कमरूनाग भी रविवार सुबह ही शहर में पहुंचे। चौहट्टा की परिक्रमा की व सेरी पैवेलियन में कुछ देर विराजमान होकर लोगों को दर्शन देकर यहां से रवाना हो गए। इससे पहले शनिवार को मंडी पहुंचे राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने सेरी मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अंतिम संध्या में शिरकत की। उन्होंने लोगों का अभिवादन भी किया। उपायुक्त व मेला समिति के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने उनको स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। लेडी गवर्नर भी उनके साथ रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा