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हिमाचल में मछुआरों को बड़ी राहत, मत्स्य आखेट पर रॉयल्टी घटाई

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शिमला, 03 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के हजारों मछुआरा परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने जलाशयों से होने वाले मत्स्य आखेट (मछली पकड़ने) पर लगने वाली रॉयल्टी को 7.5 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 1 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है।

सरकार का कहना है कि इस फैसले से राज्य के प्रमुख जलाशयों पर निर्भर 6,500 से अधिक मछुआरा परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें गोबिंद सागर, पोंग बांध, चमेरा, रंजीत सागर और कोल बांध जलाशय शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग मछली पकड़ने के व्यवसाय से अपनी आजीविका चलाते हैं।

राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया था। अब इसे और कम करके 1 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे मछुआरों की आय में बढ़ोतरी होगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार मछुआरों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क में कमी से मछुआरों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा और उनके व्यवसाय की लागत भी कम होगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार पहले की रॉयल्टी व्यवस्था का असर मछुआरा सहकारी समितियों और व्यक्तिगत मछुआरों की कमाई पर पड़ रहा था। अब रॉयल्टी को एक प्रतिशत तक घटाने से मछली पकड़ने का काम अधिक लाभदायक बनेगा। उन्होंने कहा कि इससे जलाशय क्षेत्रों से लोगों के पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी और राज्य की उभरती हुई ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार ने मत्स्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह सभी पंजीकृत मछुआरों तक इस नई व्यवस्था की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ हर पात्र मछुआरे तक पहुंचे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा