पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए शिमला में बनी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट
शिमला, 03 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई अब विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। प्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए शिमला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश (वन) की अदालत को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित किया है। इस संबंध में गृह विभाग ने अधिसूचना जारी की है।
इसके अनुसार शिमला स्थित जिला एवं सत्र न्यायाधीश (वन) की अदालत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेगी। इस कानून के दायरे में सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल करने और अन्य अनुचित गतिविधियों से संबंधित अपराध आते हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अब प्रदेश में विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।
प्रदेश सरकार ने यह कदम सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की वर्ष 2026 में संशोधित धारा 12ए की उपधारा (2) के तहत उठाया है। इस प्रावधान के तहत राज्यपाल को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करने का अधिकार प्राप्त है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश भी प्राप्त हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने शिमला की अदालत को इन मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी सौंपी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को लेकर यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पेपर लीक और नकल जैसी गतिविधियों से परीक्षाओं की निष्पक्षता प्रभावित होती है। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध होगी। सरकार का उद्देश्य इन अपराधों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा करना और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

