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डीएसपी के जातिगत उत्पीड़न के आरोपों पर एससी आयोग गंभीर, तबादले के रिकॉर्ड तलब

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डीएसपी के जातिगत उत्पीड़न के आरोपों पर एससी आयोग गंभीर, तबादले के रिकॉर्ड तलब


शिमला, 10 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीएसपी विजय कुमार की जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पुलिस विभाग से तबादले और ज्वाइनिंग से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। आयोग ने 5 नवंबर, 2025 की सरकारी अधिसूचना, बाद के तबादला आदेशों, मूवमेंट ऑर्डर और ड्यूटी आवंटन से संबंधित दस्तावेज कालक्रम के अनुसार प्रस्तुत करने की सिफारिश की है। साथ ही उसी अवधि में तबादला किए गए समान परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा (एचपीपीएस) अधिकारियों का तुलनात्मक ब्योरा भी मांगा है।

आयोग ने शिकायतकर्ता को उनकी चिकित्सा स्थिति के अनुरूप ड्यूटी देने और पात्र सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं करने की सिफारिश की है। आयोग ने जाति के आधार पर भेदभाव या आयोग में शिकायत करने के कारण प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने पर भी जोर दिया है। संबंधित प्राधिकारी की अगली सुनवाई में उपस्थिति सुनिश्चित करने और 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा गया है।

आयोग ने ये टिप्पणियां 10 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में हुई सुनवाई के कार्यवृत्त में दर्ज की हैं। सुनवाई आयोग के सदस्य डॉ. पार्थ बिस्वास ने की। हिमाचल प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) आरडी नजिम और शिकायतकर्ता विजय कुमार उपस्थित थे।

विजय कुमार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के आदेश पर शिमला से एसडीपीओ पांवटा साहिब स्थानांतरित किए जाने के बाद उन्हें कार्यभार संभालने से रोकने के लिए धमकाया गया और दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका सरकारी वाहन वापस लिया गया, जिम्मेदारियां घटाई गईं, उन्हें पेशेवर स्तर पर अलग-थलग किया गया और चिकित्सा स्थिति के विपरीत शारीरिक रूप से कठिन ड्यूटी सौंपी गई। वह 12 मार्च से 10 मई, 2026 तक चिकित्सा अवकाश पर रहे थे। उन्होंने स्वतंत्र जांच और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

पुलिस विभाग ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ था और रिकॉर्ड में जातिगत भेदभाव के प्रमाण नहीं मिले। विभाग के अनुसार, बाद में विजय कुमार का तबादला दूसरी भारतीय रिजर्व बटालियन, सकोह, जिला कांगड़ा में किया गया, लेकिन उन्होंने चिकित्सा कारणों से वहां कार्यभार नहीं संभाला। विभाग ने दिल्ली में आयोग की सुनवाई में उनकी उपस्थिति का हवाला देकर उनकी चिकित्सा संबंधी असमर्थता पर सवाल उठाए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि सुनवाई में शामिल होने के लिए दिल्ली की यात्रा करना अपने आप में शारीरिक रूप से कठिन या मैदानी ड्यूटी करने में सक्षम होने का प्रमाण नहीं है।

आयोग ने डीजीपी के लगातार पेश न होने पर भी गंभीर चिंता जताई। कार्यवृत्त के अनुसार 20 अगस्त की पिछली सुनवाई में संबंधित प्राधिकारी उपस्थित नहीं हुआ था। विभाग ने अनुपस्थिति का कारण विधानसभा का मानसून सत्र बताया और कहा कि वाहन साझा पूल से जरूरत के अनुसार आवंटित किए जाते हैं। आयोग ने वाहन आवंटन के नियम, वाहन वापस लेने के किसी लिखित आदेश और विजय कुमार को सौंपी गई जिम्मेदारियों का ब्योरा देने की सिफारिश की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा