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नाहन मेडिकल कॉलेज में घमासान: डेटा एंट्री ऑपरेटर और अधीक्षक में ठनी

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नाहन, 24 सितंबर (हि.स.)। डॉ. वाई.एस. परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन के चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में आउटसोर्स कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच उपजा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। बीते बुधवार को आउटसोर्स डेटा एंट्री ऑपरेटर नवीन कुमार द्वारा मीडिया के समक्ष आकर लगाए गए आरोपों के बाद, आज अधीक्षक ने भी मीडिया के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा है और कर्मचारी के दावों को रंजिश से प्रेरित करार दिया है।

बीते बुधवार को मीडिया के सामने आए डेटा एंट्री ऑपरेटर नवीन कुमार ने अधीक्षक हेमलता वर्मा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे। नवीन कुमार का आरोप था कि अधीक्षक अक्सर सुबह 11:00 से 11:30 बजे के बाद ही दफ्तर पहुंचती हैं और आकर कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका के साथ छेड़छाड़ करती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्य हाजिरी रजिस्टर को कार्यालय से हटा दिया जाता है और कर्मचारियों की उपस्थिति पर अनुचित सवाल खड़े करके उनका उत्पीड़न किया जाता है। नवीन कुमार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की थी। नवीन ने ऑन-कैमरा विभिन्न पन्नों और दस्तावेजों को दिखाते हुए दावा किया कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन उन पर कोई उचित संज्ञान नहीं लिया गया। उन्होंने साफ कहा कि उनके पास इन सभी बातों के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

वीरवार को मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए अधीक्षक हेमलता वर्मा ने नवीन कुमार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी देरी का कारण बताते हुए स्पष्ट किया कि उनके पति पिछले लंबे समय से गंभीर मानसिक व न्यूरो संबंधी बीमारी से ग्रस्त हैं और पूरी तरह बेड रेस्ट पर हैं। घर में देखभाल के लिए कोई अन्य सदस्य न होने के कारण उन्हें सारा काम खुद संभालना पड़ता है, जिससे कभी-कभार दफ्तर आने में देरी हो जाती है। उन्होंने इसकी लिखित पूर्व सूचना उच्च अधिकारियों को दी हुई है। अधीक्षक का दावा है कि उनका प्रशासनिक कार्य सुचारू है और उनकी वजह से विभाग को कभी कोई शिकायत नहीं मिली।

कर्मचारी के आचरण पर बात करते हुए अधीक्षक ने बताया कि नवीन कुमार का सर्विस रिकॉर्ड शुरू से ही ठीक नहीं रहा है। वर्ष 2021-22 में भी जनता और विभाग की शिकायतों के चलते उसे अन्य जगह स्थानांतरित किया गया था। हाल ही में निरीक्षण के दौरान जब वह बार-बार अपने काउंटर से गायब पाया गया और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक रिपोर्ट तैयार की गई, तो उसने रंजिश में आकर यह बयानबाजी की है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी कर्मचारी द्वारा बिना विभागीय इजाजत सीधे मीडिया में बयान देना सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन है। अधीक्षक ने मामले से जुड़े सभी कागजात और अपनी लिखित रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर