उद्यमियों ने जानी डिजिटल साक्षरता और जेम पोर्टल की बारीकियां
शिमला, 05 जून (हि.स.)। छोटे कारोबारियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए डिजिटल दुनिया के अवसरों को समझना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी होता जा रहा है। इसी दिशा में बिलासपुर जिले के स्वारघाट में शुक्रवार को उद्योग विभाग ने एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की, जिसमें स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को डिजिटल साक्षरता, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी खरीद प्रणाली से जुड़ने के तरीकों की जानकारी दी गई।
यह कार्यशाला सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैम्प) कार्यक्रम के तहत सरकारी विश्राम गृह, स्वारघाट में आयोजित की गई। इसमें 30 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमी शामिल रहे।
कार्यशाला के पहले सत्र में प्रतिभागियों को डिजिटल युग में कारोबार को आगे बढ़ाने के तरीके बताए गए।
प्रशिक्षकों ने समझाया कि सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप बिजनेस, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन विपणन जैसे साधनों का उपयोग करके छोटे उद्यमी कम लागत में अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही वित्तीय प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बजट तैयार करने, नकदी प्रवाह को समझने, बैंकिंग सेवाओं का बेहतर उपयोग करने और विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्हें वित्तीय रिकॉर्ड रखने और डिजिटल लेन-देन अपनाने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए।
कार्यशाला के दूसरे चरण में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जेम के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, स्वयं सहायता समूह और स्टार्टअप सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद और सेवाएं बेच सकते हैं। इससे उन्हें पारदर्शी प्रक्रिया, समय पर भुगतान और देशभर के बाजार तक पहुंच का अवसर मिलता है।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों को जेम पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया भी समझाई गई। कई महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों ने मौके पर ही अपना प्रोफाइल बनाकर विक्रेता के रूप में पंजीकरण कराया। अधिकारियों ने पंजीकरण के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान भी किया और प्रतिभागियों को पोर्टल के इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दी।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विभागीय अधिकारियों ने कहा कि रैम्प कार्यक्रम के तहत आयोजित की जा रही ऐसी क्षेत्रीय कार्यशालाएं ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना था कि डिजिटल साक्षरता और जेम जैसी सरकारी ई-खरीद प्रणाली से जुड़कर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर का बाजार मिल सकता है, जिससे छोटे उद्यमियों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

