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सीपीआरआई शिमला में जुटे वैज्ञानिक-किसान, आलू की रसायन मुक्त खेती और बेहतर वैल्यू चेन पर मन्थन

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शिमला, 01 मई (हि.स.)। राजधानी शिमला केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) में “पोटैटो वैल्यू चेन को मजबूत करना” विषय पर शुक्रवार को स्टेकहोल्डर्स सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से किसान, वैज्ञानिक, आलू उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और नीति निर्माता शामिल हुए। सभी ने मिलकर आलू उत्पादन से लेकर उसके विपणन तक की पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर चर्चा की।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त आलू की खेती आज समय की जरूरत बन चुकी है। उनके मुताबिक, खेतों में ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल न केवल किसानों की सेहत के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी कम होती है और खेती की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।

डॉ. जाट ने बताया कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना ICAR का प्रमुख लक्ष्य है और इसी दिशा में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए अनुसंधान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को आलू की जन्मभूमि माना जाता है और सीपीआरआई ने अब तक 50 से अधिक उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनका फायदा देश और विदेश के किसानों को मिला है।

उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर आलू की फसल में बीमारियों का खतरा बना रहता है। इससे निपटने के लिए संस्थान रोगमुक्त बीज आलू किसानों तक पहुंचाने पर काम कर रहा है। एयरोपोनिक तकनीक के जरिए वायरस मुक्त बीज तैयार करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन को आलू उत्पादन के लिए एक बड़ी चुनौती बताया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि बदलते मौसम के अनुसार नई किस्में और तकनीक विकसित की जा रही हैं, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।

इस दौरान बीज उत्पादन, फसल सुरक्षा, भंडारण, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया, ताकि खेती टिकाऊ और लाभकारी बन सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा