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लाहौल स्पीति में कुंजुम पास के नीचे बनाएंगे टनल, पहले होगा सर्वे : सुक्खू

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लाहौल स्पीति में कुंजुम पास के नीचे बनाएंगे टनल, पहले होगा सर्वे : सुक्खू


शिमला, 14 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में सालभर सड़क संपर्क बेहतर बनाने के लिए कुंजुम पास के नीचे टनल बनाने की दिशा में सरकार ने पहल करने की बात कही है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने टनल निर्माण के लिए सर्वे करवाने और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस टनल के निर्माण के लिए प्रयास कर रही है। इसके बनने से क्षेत्र के लोगों और पर्यटकों को सालभर बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी के विकास के लिए आने वाले समय में 500 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने अपने दो दिवसीय स्पीति दौरे के दौरान बुधवार को काजा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्पीति घाटी को प्राकृतिक खेती क्षेत्र घोषित किया जाएगा। काजा में कॉलेज खोलने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ और मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति भी की जाएगी। इसके अलावा काजा में हेलिपोर्ट बनाने के लिए सर्वे करवाने का आश्वासन दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों को भी लाभ होगा।

समदो-काजा बिजली लाइन पर खर्च होंगे 350 करोड़

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पीति के विकास में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाना भी सरकार की प्राथमिकता है। समदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन का काम तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार स्पीति के लोगों की आय दोगुनी करने की दिशा में प्रयास कर रही है।

सुक्खू ने बताया कि जब वह पहली बार 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस कार्यक्रम के दौरान इस क्षेत्र में आए थे, तब स्थानीय लोगों ने बिजली की समस्या उनके सामने रखी थी। अब इस दिशा में किए गए प्रयास जमीन पर उतरने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का करीब 42 प्रतिशत भू-भाग शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में आता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों के विकास के लिए सरकार विशेष ध्यान दे रही है और अधिक धन खर्च कर रही है।

दिवाली पर महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने पर विचार

मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के कल्याण और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हित में लगातार काम कर रही है। दिवाली के अवसर पर महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को वृद्धावस्था में आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने और सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से पुरानी पेंशन योजना बहाल की गई है। आने वाले समय में और कर्मचारियों को इसके दायरे में लाने पर भी विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ओपीएस लागू करने के कारण केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को हर साल मिलने वाले 1,600 करोड़ रुपये रोक दिए हैं।

स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की उपलब्धता 35 से बढ़कर 70 प्रतिशत होने का दावा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर केंद्र सरकार और पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा राज्य सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च को लेकर सवाल कर रहे हैं। सुक्खू के मुताबिक, पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में केवल 35 प्रतिशत कर्मचारी उपलब्ध थे। वर्तमान सरकार के प्रयासों से यह संख्या बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद क्रिटिकल केयर ब्लॉक का काम शुरू करवाया। आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 से 2027 के बीच इस योजना में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 26 करोड़ रुपये है, जबकि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने लगभग 204 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा