भाजपा पांच गुटों में बंटी, इसलिए असम के मुख्यमंत्री को हिमाचल लाना पड़ा : मुख्यमंत्री सुक्खू
शिमला, 02 नवंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा की शिमला में आयोजित लोकतंत्र बचाओ रैली और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के आरोपों पर पलटवार किया है। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है। इन गुटों को एकजुट करने के लिए ही भाजपा को असम के मुख्यमंत्री को हिमाचल लाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस फिर से सरकार बनाएगी। सुक्खू ने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने संबोधन में अगले शपथ ग्रहण समारोह में आने की बात कही थी। कांग्रेस की अगली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया जाएगा और असम के मुख्यमंत्री को भी न्योता भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री सोमवार को दिल्ली से शिमला लौटने पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के 16 विधायकों की चुनावी क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के 16 विधायक अभी ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि वे दोबारा चुनाव जीत सकें। सुक्खू ने दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव के परिणाम आने पर उनके इस बयान की सच्चाई सामने आ जाएगी। भाजपा की रैली और असम के मुख्यमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा के भीतर कई गुट हैं और पार्टी को उन्हें एकजुट करने के लिए दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री की मदद लेनी पड़ रही है।
ईवीएम पर सवाल उठाने के समय को लेकर सुक्खू ने उठाए सवाल
ईवीएम को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को समयक्रम के आधार पर समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे, जबकि ईवीएम को लेकर सवाल वर्ष 2024 के बाद उठाए गए। सुक्खू ने कहा कि इन सभी बातों को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने ईवीएम के मुद्दे पर भाजपा के रुख और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में समयक्रम को महत्वपूर्ण बताया।
आरडीजी बंद होने के बाद भी आर्थिक व्यवस्था संभालने का दावा
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों से प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद सरकार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सुक्खू ने दावा किया कि आरडीजी में करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये की कमी आने के बावजूद प्रदेश सरकार ने अपनी आर्थिक व्यवस्था को संभाला है। उन्होंने इसे सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक संसाधनों का सही इस्तेमाल जरूरी है।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक और आर्थिक संपदा को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जो संपदा है, उस संपदा को न तो हम लुटने दे रहे हैं, न लूट रहे हैं, न लुटने देंगे और न ही लुटाएंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार प्रदेश के संसाधनों का संरक्षण करते हुए हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
दिल्ली की रैली में लोकतंत्र और मतदाता सूची का मुद्दा उठाया
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और विपक्षी दलों की रैली को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम जनता की आवाज उठाना है। रैलियां और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और यह देखकर उन्हें खुशी हुई कि जनता लोकतंत्र तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से ले रही है।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से धांधली की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी इस मुद्दे को उठा रहे हैं और इसे रोकने के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। सुक्खू के अनुसार दिल्ली की रैली में हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

