हिमाचल में दो साल में 86 बार बादल फटे, सुक्खू ने परखी रेडी-एचपी परियोजना
शिमला, 12 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पिछले दो वर्षों के दौरान प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है। राज्य में वर्ष 2023 से 2025 के बीच दो साल में बादल फटने की 86, भूस्खलन की 234 और बाढ़ की 121 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनसे 12,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमालयी भू-वैज्ञानिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण हिमाचल प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है और अब राज्य को आपदा के बाद तेज राहत व पुनर्वास के लिए मजबूत ढांचे की जरूरत है।
शिमला में मंगलवार को आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने 2687 करोड़ रुपये की ‘रेज़िलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी हिमाचल प्रदेश’ (रेडी-एचपी) परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में अहम पहल साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के तहत आपदा प्रभावित आधारभूत ढांचे जैसे सड़कें, जलापूर्ति योजनाएं, बिजली नेटवर्क और आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं की पुनर्स्थापना पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में आपदा के बाद पुनर्वास के लिए एक प्रभावी और स्थायी तंत्र विकसित किया जाएगा ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत और मजबूत पुनर्वास सुविधा मिल सके।
उन्होंने कहा कि रेडी-एचपी परियोजना केवल ढांचागत सुधार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी फोकस करेगी। ग्रीन पंचायत जैसी योजनाओं के माध्यम से लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाने और सामाजिक सुरक्षा व बीमा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने किसानों और बागवानों के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय फसल और आजीविका की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

