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खट्टर से मिले मुख्यमंत्री सुक्खू, मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने का उठाया मुद्दा

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खट्टर से मिले मुख्यमंत्री सुक्खू, मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने का उठाया मुद्दा


शिमला, 17 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास और शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को उनके समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं से संबंधित लंबित ऊर्जा बकाये के भुगतान का मुद्दा उठाया।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा संचालित उन जलविद्युत परियोजनाओं में, जिनके संचालन के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं, राज्य को मिलने वाली सामान्य 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त भी अधिक हिस्सेदारी दी जाए। उन्होंने 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूरे हो चुके हैं, इसलिए इसमें राज्य की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जानी चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी परियोजनाओं से जुड़े ऊर्जा बकाये का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश के हजारों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा था और राज्य को पर्यावरणीय नुकसान भी झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि पौंग बांध से विस्थापित लोगों का पुनर्वास आज तक पूरी तरह नहीं हो पाया है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पंजाब और हरियाणा की सहमति लेकर 31 अक्तूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाये तथा उसके बाद 6 प्रतिशत ब्याज सहित यह राशि हिमाचल प्रदेश को दिलाई जाए। उन्होंने बताया कि यदि इस बकाये का भुगतान नकद किया जाता है, तो 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज के आधार पर इसकी अनुमानित राशि लगभग 7,784 करोड़ रुपये बनती है।

सुक्खू ने बैठक में शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी उठाया और इस परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकार का पक्ष रखा। इसके अलावा उन्होंने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ परियोजनाओं के विकास के लिए भी केंद्र से वित्तीय सहायता मांगी। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण, निवेश, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य सरकार 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित कर रही है। इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले चरण में केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव’ के तहत स्वच्छता और कचरा प्रबंधन कार्यों के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध भी किया।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अमृत योजना के तहत पहले से स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने और अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी स्थानीय निकायों में प्रस्तावित 43 परियोजनाओं को मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि राज्य में सभी संपत्तियों को विशिष्ट पहचान देने के लिए क्यूआर-आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली लागू की जा रही है। इस परियोजना के दूसरे चरण के लिए अगले पांच वर्षों में 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का भी अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा