मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल विश्वविद्यालय में किया नए भवनों का लोकार्पण-शिलान्यास, ग्रीन हाइड्रोजन रिसर्च पर दिया जोर
शिमला, 19 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला (एचपीयू) में शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए विश्वविद्यालय से ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश के लिए बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं और विश्वविद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने 10.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मल्टी फैकल्टी भवन और नवनिर्मित कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब का उद्घाटन किया। मल्टी फैकल्टी भवन में तीन शैक्षणिक मंजिलें, सीबीटी लैब और पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा उन्होंने 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए पांच मंजिला अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास भी किया, जिसमें नई कक्षाएं और अतिरिक्त शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार एचपीयू को मजबूत बनाने के लिए हर वर्ष करीब 150 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि इन निवेशों से विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, डिजिटल परिवर्तन और शैक्षणिक गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और पिछले वर्षों में संस्थान में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक कौशल और ज्ञान अर्जित करने का आह्वान किया।
ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सोलन जिले के नालागढ़ में प्रदेश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और शिक्षकों से इस क्षेत्र में अनुसंधान बढ़ाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से राज्य को प्रतिवर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार राज्य के अधिकारों की रक्षा और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित नई सीबीटी लैब से शिमला सहित आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। अब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के कंप्यूटर आधारित टेस्ट देने के लिए उन्हें दूसरे जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इस लैब में एक समय में करीब 250 अभ्यर्थी परीक्षा दे सकेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

