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तीन माह में सीबीएसई स्कूलों में दो हज़ार शिक्षकों की नियुक्ति होगी: सुक्खू

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तीन माह में सीबीएसई स्कूलों में दो हज़ार शिक्षकों की नियुक्ति होगी: सुक्खू


शिमला, 19 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अगले तीन माह के भीतर दो हज़ार और शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को सोलन जिले के अर्की में राज्य स्तरीय सायर मेले के समापन समारोह में यह घोषणा की।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में शुरू किए गए 150 सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों का चयन योग्यता के आधार पर किया जा रहा है और किसी तरह की सिफारिश नहीं की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रत्येक सीबीएसई स्कूल में पहले ही पांच से आठ शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है और बाकी पद भी जल्द भरे जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों में सीबीएसई की पढ़ाई काफी महंगी है। राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में भी इसी स्तर की सुविधाएं कम खर्च में उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार कर रही है। मेडिकल कॉलेजों में 15 से 19 वर्ष पुराने उपकरणों को हटाकर एम्स नई दिल्ली की तर्ज पर आधुनिक मशीनरी उपलब्ध करवाई गई है और जांच सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है और अर्की में भी जल्द विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में 200 चिकित्सकों की भर्ती की है और जल्द 228 और चिकित्सकों की भर्ती की जाएगी।

सुक्खू ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कदम उठा रही है। दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि की गई है और अदरक को न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ किसानों को सीधे आर्थिक लाभ देना है। किशाऊ बहुद्देश्यीय परियोजना के समझौते का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार ने समझौते की पहले से तय शर्तों को स्वीकार किया था। उनका दावा है कि यदि भाजपा की सरकार होती तो हिमाचल पर तीन हज़ार करोड़ पांच हज़ार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता था और राज्य 1,200 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये तक की संभावित वार्षिक आय से वंचित हो सकता था। उन्होंने कहा कि उनका मत है कि जिन राज्यों को पानी की जरूरत है, उन्हें ही विद्युत परियोजना की लागत भी वहन करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में करीब पांच हज़ार बीघा भूमि कुछ पसंदीदा उद्योगपतियों को बिना पंजीकरण शुल्क के आवंटित की गई, लेकिन वहां अभी तक कोई उद्योग स्थापित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसे आवंटनों को रद्द करने पर विचार कर रही है।

मुख्यमंत्री ने दिग्गल, भूमती और जयनगर के स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने की घोषणा की। उन्होंने कुनिहार-सारमा, मांगू-मलावण, जाबल-जयनगर, भूमती-डाडल-पिपलूघाट और कोहू-भियूंकरी वाया सौर सड़कों की मरम्मत के लिए धन उपलब्ध करवाने की घोषणा भी की। विधायक संजय अवस्थी की मांग पर उन्होंने अर्की में कौशल विकास केंद्र खोलने के प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने शिमला-धैना बस सेवा बहाल करने की घोषणा भी की।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा