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हिमाचल में ग्रीनहाउस-पॉलीहाउस में होगी भांग की खेती, निजी इस्तेमाल और खुली खेती पर रहेगी रोक

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हिमाचल में ग्रीनहाउस-पॉलीहाउस में होगी भांग की खेती, निजी इस्तेमाल और खुली खेती पर रहेगी रोक


शिमला, 03 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पहली बार भांग की खेती को लेकर स्पष्ट और विस्तृत नियम लागू हो गए हैं। अब राज्य में भांग की खेती केवल औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए ही की जा सकेगी। सरकार ने हिमाचल प्रदेश नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। अधिसूचना राजपत्र (ई-गजट) में प्रकाशित होने के साथ ही ये नियम प्रभावी हो गए हैं। सरकार का कहना है कि नए नियमों से एक नियंत्रित व्यवस्था तैयार होगी, जिसमें खेती से लेकर भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और दवा बनाने तक हर चरण पर निगरानी रहेगी। साथ ही किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं।

खुले खेतों में नहीं, सिर्फ सुरक्षित ग्रीनहाउस और पॉलीहाउस में होगी खेती

नए नियमों के तहत भांग की खेती खुले खेतों में नहीं की जा सकेगी। इसकी खेती केवल पूरी तरह घिरे हुए और सुरक्षित ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में ही होगी। खेती वाले परिसर की जियो टैगिंग करानी होगी। वहां एक ही प्रवेश और निकास द्वार होगा। सीसीटीवी कैमरे, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और आने-जाने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। किसानों को फसल की कटाई शुरू होने से पहले भंडारण के लिए गोदाम भी तैयार करना होगा। इसके अलावा खेती, कटाई, उपज के वजन और किसी भी अनधिकृत प्रवेश की कोशिश का पूरा रिकॉर्ड रखना भी जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों से पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकेगी।

सिर्फ दवा और शोध के लिए उपयोग, निजी इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित

सरकार ने साफ कर दिया है कि भांग की खेती केवल दवाइयों के निर्माण और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए होगी। किसी भी व्यक्ति को निजी इस्तेमाल, मनोरंजन, बिना अनुमति बिक्री या परिवहन की छूट नहीं होगी। खेती करने वालों को केवल अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं से प्रमाणित देशी बीज ही खरीदने होंगे। बीजों के साथ उनकी गुणवत्ता और कैनाबिनॉयड की मात्रा का प्रमाणपत्र भी देना होगा। खेती कम से कम तीन एकड़ में एक साथ जुड़े हुए क्षेत्र में की जा सकेगी। हालांकि सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को इस शर्त से छूट दी गई है। बीज उपलब्ध कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं को भी आबकारी विभाग से लाइसेंस लेना होगा और परिवहन के लिए अलग परमिट लेना जरूरी होगा।

100 करोड़ निवेश पर ही लगेगी निर्माण इकाई, कारोबार पर लगेगा तीन प्रतिशत उपकर

भांग से औषधीय उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के लिए भी सरकार ने कड़े मानक तय किए हैं। ऐसी इकाई स्थापित करने के लिए कम से कम 100 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करना होगा। इन इकाइयों को वार्षिक कारोबार पर तीन प्रतिशत राज्य उपकर भी देना होगा। इसमें दो प्रतिशत दूध उपकर और एक प्रतिशत पर्यावरण उपकर शामिल रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंसधारी भी भांग के किसी हिस्से का उपयोग केवल स्वीकृत औषधीय और वैज्ञानिक कार्यों के लिए ही कर सकेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा