हिमाचल में संघ के चार प्रचारकों की जीवन यात्रा पर पुस्तक का शिमला में विमोचन
शिमला, 27 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हिमाचल प्रदेश में संगठन विस्तार में योगदान देने वाले चार प्रचारकों के जीवन व संघर्ष को अब एक पुस्तक में संजोया गया है। मातृवन्दना संस्थान की ओर से प्रकाशित और डॉ. रश्मीश सिंह सपेइया द्वारा लिखित पुस्तक ‘हिमगिरि सा चुपचाप गले’ का सोमवार को शिमला के गेयटी थिएटर स्थित गौथिक हॉल में विमोचन किया गया। पुस्तक में ठाकुर राम सिंह, चेत राम, कुंज लाल ठाकुर और किशन चंद राजपूत के जीवन और उनके संगठनात्मक योगदान का उल्लेख किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएसएस हिमाचल प्रांत के संघचालक वीर सिंह रांगड़ा ने की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल ने पुस्तक की भूमिका रखते हुए कहा कि इसमें उन चार प्रचारकों-कार्यकर्ताओं के जीवन को स्थान दिया गया है, जिन्होंने हिमाचल में संघ के कार्य को चुपचाप आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश के शहरों के साथ दूरदराज के गांवों तक संघ का कार्य पहुंच चुका है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आरएसएस के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर ने कहा कि वर्ष 1925 में नागपुर से शुरू हुई व्यक्ति निर्माण की परंपरा को हिमाचल में आगे बढ़ाने में पुस्तक में शामिल चारों कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय कुंज लाल ठाकुर ने प्रचारक के रूप में भारत विभाजन के दौरान कश्मीर में हिंदुओं को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने स्वर्गीय किशन चंद राजपूत का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जीवनभर संघ कार्य किया और जरूरतमंदों की सेवा तथा न्याय के पक्ष में खड़े रहे।
वीर सिंह रांगड़ा ने अपने संबोधन में आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया और ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण किया, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा को अपना ध्येय बनाया।
मुख्य अतिथि सिकंदर कुमार ने कहा कि पुस्तक में जिन चार कार्यकर्ताओं के जीवन संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण का वर्णन किया गया है, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उनके परिश्रम और कार्यशैली से सीख लेकर समाज में एकता और सद्भाव को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने नई पीढ़ी के लिए अच्छे चरित्र, देशभक्ति और सामाजिक मूल्यों को जरूरी बताया।
मातृवन्दना संस्थान के अध्यक्ष उमेश मोदगिल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ‘हिमगिरि सा चुपचाप गले’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं के साथ आम पाठकों को भी संघ की कार्यप्रणाली और उसके कार्यकर्ताओं के योगदान को समझने में मदद करेगी। कार्यक्रम में मातृवन्दना संस्थान के सदस्य एवं लेखक डॉ. कर्म सिंह ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत की। इस अवसर पर गोविंद ठाकुर और वीरेन्द्र सपेइया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

