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जयराम सरकार में आए 92 हज़ार 439 करोड़ के निवेश को कांग्रेस ने रोका : भाजपा

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जयराम सरकार में आए 92 हज़ार 439 करोड़ के निवेश को कांग्रेस ने रोका : भाजपा


शिमला, 16 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में निवेश और विकास के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर पूर्व भाजपा शासन में आये 92 हज़ार करोड़ के निवेश को धरातल पर उतरने से रोकने का आरोप लगाया है।

त्रिलोक कपूर ने सोमवार को कहा कि यदि प्रदेश में विकास कार्यों और निवेश की बात की जाए तो 2017 से 2022 तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उन्होंने दावा किया कि उस समय प्रदेश में औद्योगिक विकास, पर्यटन, आईटी, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में आयोजित राइजिंग हिमाचल ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट को प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी निवेश पहल माना गया था। इस दौरान कुल 603 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें लगभग 92 हज़ार 439 करोड़ रुपये के संभावित निवेश का अनुमान लगाया गया था। इन समझौतों में एग्रीबिजनेस, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी, सिविल एविएशन, हाइड्रो और नवीकरणीय ऊर्जा, वेलनेस एवं आयुष, हाउसिंग और शहरी विकास तथा आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आठ प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया था।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आईटी सेक्टर में भी उस समय 14 एमओयू किए गए थे, जिनकी अनुमानित निवेश राशि करीब 2,833 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा वर्ष 2019 की पर्यटन नीति के तहत होटल परियोजनाओं, वेलनेस सेंटर और केबल कार परियोजनाओं के लिए भी कई निवेश प्रस्ताव आए थे।

उन्होंने बताया कि मार्च 2022 में सोलन जिले के नालागढ़ में स्थापित किए जाने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए उद्योग विभाग ने निवेशकों के साथ 810 करोड़ रुपये के 15 एमओयू किए थे। उनका कहना है कि इससे प्रदेश में फार्मा और मेडिकल उपकरण उद्योग को बढ़ावा मिलने की संभावना थी।

त्रिलोक कपूर ने यह भी कहा कि जयराम ठाकुर सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2021–22 के दौरान छह एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, जिनकी अनुमानित निवेश राशि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक थी। इसके साथ ही वर्ष 2022 में 27 जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भी समझौते किए गए थे, जिनकी संभावित उत्पादन क्षमता 722.4 मेगावाट बताई गई थी। ये परियोजनाएं चंबा, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, शिमला और किन्नौर जिलों में प्रस्तावित थीं।

उन्होंने कहा कि निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भाजपा सरकार ने 2018 में स्टेट सिंगल विंडो (इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट लागू किया था, ताकि उद्योगों को अनुमति और मंजूरी लेने की प्रक्रिया सरल हो सके। इसके अलावा निवेश परियोजनाओं की निगरानी के लिए “राइजिंग हिमाचल” मोबाइल ऐप और “हिमप्रगति” पोर्टल भी शुरू किए गए थे, जिससे निवेश से जुड़े एमओयू को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके।

त्रिलोक कपूर ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने भाजपा सरकार के समय आए इन निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के बजाय उनमें रुकावटें खड़ी की हैं। उनका कहना है कि सरकार ने न तो निवेश को गति दी और न ही औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा