अफसरों का कैडर घटाने से नहीं सुधरेगी अर्थव्यवस्था, सरकार बताए 200 करोड़ बचत का आधार: भाजपा
शिमला, 18 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर कम करने की राज्य सरकार की योजना को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता और विधायक राकेश जमवाल ने मंगलवार को कहा है कि सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं, वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोपों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस फैसले को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
शिमला से जारी बयान में राकेश जमवाल ने कहा कि सरकार की ओर से आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामने आई जानकारी के अनुसार आईएएस कैडर को 153 से घटाकर 130 और आईपीएस कैडर को 118 से घटाकर 83 किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही आईएफएस अधिकारियों के कैडर में भी कमी की बात सामने आई है। राज्य सरकार का दावा है कि इस कदम से करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी।
जमवाल ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कुछ अधिकारियों के पद कम करने से 200 करोड़ रुपये की बचत कैसे होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान केवल कैडर घटाने से नहीं हो सकता। उनके अनुसार यदि सरकार वास्तव में खर्च कम करना चाहती है तो उसे वित्तीय अनुशासन और अनावश्यक खर्चों पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा नेता ने एक अन्य मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक माहौल के कारण अधिकारियों में असहजता बढ़ रही है। जमवाल ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर अधिकारी हिमाचल से बाहर जाने को क्यों प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि अनुभवी अधिकारी राज्य में काम करने के बजाय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को बेहतर विकल्प मान रहे हैं तो यह सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। उनके अनुसार इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
राकेश जमवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी चाहिए और अधिकारियों को स्वतंत्र माहौल में काम करने का अवसर देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक ओर 200 करोड़ रुपये की बचत का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल पर कर तथा विभिन्न शुल्क बढ़ाकर लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उनके अनुसार बिजली, पानी, राशन, बस किराये, सीमेंट और स्टांप ड्यूटी समेत कई क्षेत्रों में लोगों का खर्च बढ़ा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

