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सरकार की वॉकथॉन जारी , चिट्टा माफिया की मेराथॉन पड़ रही भारी : राकेश जम्बाल

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सरकार की वॉकथॉन जारी , चिट्टा माफिया की मेराथॉन पड़ रही भारी : राकेश जम्बाल


मंडी, 06 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्बाल ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी के साथ-साथ चिट्टा माफिया का लगातार फैलता नेटवर्क है। लेकिन सरकार इस चुनौती से लड़ने के बजाय वॉकथॉन जैसे प्रचारात्मक कार्यक्रमों में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि आज पूरे प्रदेश में सरकार की वॉकथॉन चल रही है, जबकि चिट्टा माफिया की मेराथॉन उससे कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से दौड़ रही है। राकेश जमवाल ने कहा कि पिछले लगभग चार वर्षों में प्रदेश के लगभग हर जिले से चिट्टा बरामदगी, नशा तस्करों की गिरफ्तारी और अंतरराज्यीय गिरोहों के सक्रिय होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मंडी, कांगड़ा, ऊना, बिलासपुर, सोलन, शिमला और अन्य जिलों में आए दिन पुलिस कार्रवाई हो रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि चिट्टा माफिया प्रदेश में गहरी जड़ें जमा चुका है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि सरकार इस गंभीर संकट का समाधान ढूंढने के बजाय प्रचार के माध्यम से अपनी छवि चमकाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में नशे के खिलाफ गंभीर होती तो उसकी प्राथमिकता चिट्टा माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करना, बड़े सरगनाओं तक पहुंचना, उनकी अवैध संपत्तियां जब्त करना और युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालना होती। लेकिन सरकार के लिए प्राथमिकता कार्यक्रमों की तस्वीरें और सुर्खियां बन गई हैं। वॉकथॉन से नशा नहीं रुकेगा, चिट्टा माफिया पर लगातार और निर्णायक कार्रवाई से रुकेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि वॉकथॉन के नाम पर अब तक कितना सरकारी धन खर्च किया गया, किन-किन जिलों में इसका आयोजन हुआ और इन कार्यक्रमों से वास्तव में क्या हासिल हुआ। यदि सरकार यह भी नहीं बता सकती कि इन आयोजनों के बाद नशे के कारोबार में कितनी कमी आई, तो स्पष्ट है कि यह पूरा अभियान केवल सरकारी प्रचार तक सीमित रहा। सरकार को इवेंट मैनेजमेंट छोड़कर कानून-व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को बचाने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास वॉकथॉन आयोजित करने के लिए समय और संसाधन हैं, लेकिन चिट्टा माफिया के खिलाफ विशेष अभियान चलाने, बड़े तस्करों तक पहुंचने और उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की इच्छाशक्ति दिखाई नहीं देती। यदि सरकार वास्तव में नशे के खिलाफ गंभीर है तो उसे रोज़ाना कार्रवाई के परिणाम जनता के सामने रखने चाहिए, न कि केवल फोटो खिंचवाकर प्रचार अभियान चलाने चाहिए।

राकेश जम्बाल ने कहा कि आज प्रदेश का हर अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। गांवों से लेकर शहरों तक चिट्टा माफिया अपने पैर पसार चुका है। कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं और अनेक युवा नशे की गिरफ्त में अपना भविष्य खो रहे हैं। ऐसे समय में सरकार का दायित्व केवल जागरूकता रैलियां निकालना नहीं, बल्कि चिट्टा माफिया के खिलाफ युद्ध स्तर पर अभियान चलाना है। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मानना है कि चिट्टा माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए। बड़े तस्करों की पहचान कर उनकी संपत्ति जब्त की जाए, अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ा जाए, सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए और नशे के कारोबार को संरक्षण देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता अब प्रचार नहीं, परिणाम चाहती है। सरकार वॉकथॉन की सफलता के दावे करने के बजाय यह बताए कि पिछले लगभग चार वर्षों में चिट्टा माफिया के खिलाफ उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है। जब तक नशे के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार नहीं होगा, तब तक ऐसे आयोजन केवल सरकारी प्रचार बनकर रह जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा