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दिल्ली-हिमाचल पुलिस विवाद पर भाजपा राज्यपाल से मिली, सौंपा ज्ञापन

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दिल्ली-हिमाचल पुलिस विवाद पर भाजपा राज्यपाल से मिली, सौंपा ज्ञापन


शिमला, 26 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच हुए विवाद को लेकर प्रदेश में सियासी हलचल और तेज हो गई है। इस मुद्दे पर हिमाचल भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल गुरूवार को लोक भवन पहुंचा और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को ज्ञापन सौंपकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में कथित रूप से बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन सौंपने के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट ने विश्व स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है। उनके मुताबिक इस कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों की मौजूदगी में भारत की छवि मजबूत होकर उभरी।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि इसी दौरान यूथ कांग्रेस नेताओं ने अर्धनग्न प्रदर्शन कर देश की छवि खराब करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि यह प्रदर्शन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निर्देश पर हुआ। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में विधिसम्मत कार्रवाई कर रही थी और इसी कड़ी में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने की कोशिश की जा रही थी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस होटल से जब्त किए गए डीवीआर और अन्य दस्तावेज हासिल करना चाहती थी, क्योंकि इनसे कथित साजिश से जुड़े लोगों का खुलासा हो सकता था। ठाकुर ने आरोप लगाया कि यदि यह सामग्री सामने आ जाती तो कई लोगों की भूमिका उजागर हो सकती थी।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि इस मामले में शामिल कुछ यूथ कांग्रेस नेताओं को हिमाचल सदन में शरण दी गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि कमरों की बुकिंग मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से हुई थी। उनके अनुसार यह संगठित संरक्षण का संकेत देता है।

जयराम ठाकुर ने बताया कि जब दिल्ली पुलिस को जानकारी मिली कि कुछ आरोपी हिमाचल प्रदेश में छिपे हैं, तो पुलिस रोहड़ू के चांशल वैली होटल पहुंची और तीन लोगों सौरभ सिंह (अमेठी, उत्तर प्रदेश), अरवाज (कानपुर) और सिद्धार्थ (मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इनका हिमाचल से स्थायी संबंध न होने के बावजूद वे यहां कैसे पहुंचे और क्या उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मपुर पहुंचने पर दिल्ली पुलिस को असंवैधानिक तरीके से रोका गया और रात करीब 8:11 बजे उनके खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कर दी गई, जबकि पुलिस के पास वैध दस्तावेज और न्यायालय के आदेश मौजूद थे। ठाकुर ने कहा कि मजिस्ट्रेट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद भी दिल्ली पुलिस को रोका गया और उनके वाहन जब्त करने की कोशिश हुई, जिससे करीब 24 घंटे तक टकराव की स्थिति बनी रही।

उन्होंने कहा कि दो राज्यों की पुलिस को आमने-सामने खड़ा करना संघीय ढांचे पर सीधा आघात है। यदि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों से पुलिस तंत्र का इस्तेमाल किया है तो यह संविधान की शपथ का उल्लंघन है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इशारे पर काम कर रही है और देवभूमि को राजनीतिक शरणस्थली बनाया जा रहा है।

भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की केंद्र सरकार के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो और दोषी अधिकारियों तथा कथित राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा