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हिमाचल में विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई से बाहर करने पर भाजपा का विरोध

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शिमला, 13 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे से बाहर करने के फैसले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे असंवैधानिक और पारदर्शिता के खिलाफ बताया है।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी और नैना देवी से विधायक रणधीर शर्मा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किसी कानून में संशोधन करने का अधिकार प्रदेश सरकार को नहीं होता। उनके अनुसार हिमाचल सरकार का यह कदम संविधान की भावना के विपरीत है और इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

रणधीर शर्मा ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 संसद द्वारा पारित कानून है, जिसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और आम लोगों को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देना है। उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि जब यह कानून लागू हुआ था तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। लेकिन अब हिमाचल में कांग्रेस की सरकार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में इस कानून की मूल भावना को कमजोर कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करने वाली एक अहम एजेंसी है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी होती है, लेकिन सरकार ने इस एजेंसी को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया है। उनके मुताबिक इससे यह संदेह पैदा होता है कि सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जानकारी सार्वजनिक होने से रोकना चाहती है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विजिलेंस ब्यूरो का दुरुपयोग करना चाहती है और उसे आरटीआई से बाहर करके सरकारी मशीनरी को अपने मनमाफिक चलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे एजेंसी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

रणधीर शर्मा ने कहा कि सूचना का अधिकार नागरिकों को मिला एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जो प्रशासन को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए बनाया गया था। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार के इस फैसले से आरटीआई कानून के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है और प्रदेश सरकार से मांग करती है कि वह तुरंत इस फैसले को वापस ले। उनका कहना था कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होती है और किसी भी सरकार को जनता से जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

रणधीर शर्मा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन में विश्वास रखती है, तो उसे अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और इसे वापस लेना चाहिए, ताकि नागरिकों का सूचना का अधिकार सुरक्षित रह सके और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा