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बैंक कर्मचारियों ने केंद्र की नीतियों पर उठाए सवाल, भर्ती और पांच दिन काम की उठाई मांग

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शिमला, 23 मई (हि.स.)। राजधानी शिमला में बैंक कर्मचारियों के बड़े संगठन बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) की केंद्रीय समिति की शनिवार को दो दिवसीय बैठक शुरू हुई। इस बैठक में देश के अलग-अलग राज्यों से बैंक कर्मचारी प्रतिनिधि पहुंचे हैं। बैठक के दौरान बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों, कर्मचारियों की मांगों, नई बैंकिंग नीतियों और संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है।

बैठक में बैंक कर्मचारियों के नेताओं ने कहा कि लंबे समय से बैंक कर्मी सप्ताह में पांच दिन कामकाज लागू करने की मांग उठा रहे हैं। इस मांग को लेकर पहले भी आंदोलन और हड़ताल की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि बैंक कर्मचारियों पर लगातार काम का दबाव बढ़ रहा है और स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है।

संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बैंकों में नियमित भर्तियां नहीं की जा रही हैं और कई जगह कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स आधार पर एक साल के लिए भर्ती की जा रही है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों में असुरक्षा बढ़ रही है और बैंकिंग सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।

बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव मनु दीप घोष ने बताया कि बैंक कर्मियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन केंद्र सरकार केवल आश्वासन दे रही है और उन्हें लागू नहीं किया जा रहा।

बैठक में केंद्र सरकार की आर्थिक और बैंकिंग नीतियों पर भी सवाल उठाए गए। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाली हैं, जबकि बैंक कर्मचारियों और आम लोगों पर बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत करने के बजाय निजीकरण और आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बैंक कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों के हितों और बैंकिंग व्यवस्था को बचाने के लिए जरूरत पड़ी तो वे सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा