बगलामुखी मंदिर सेहली में धूमधाम से मनाई गई वार्षिक जाग, डायनियां रहीं विजयी
मंडी, 15 सितंबर (हि.स.)। मंडी जिला के तुगल क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्ति पीठ माता बगलामुखी मंदिर सेहली में वार्षिक जाग का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस अवसर पर सेहली मंदिर में भजनों की अविरल धारा बही। मंदिर के पुजारी अमरजीत शर्मा ने बताया कि जाग के अवसर पर पंचकुला हरियाणा के प्रसिद्ध गायक जस पाल जस्सी और जय पाल सहोता, यतिन, अभीनव ,अग्नि भजन मंडली साईंगलु, शर्मा भजन मंडली सेहली व गायक नंद लाल द्वारा माता के भजनों की प्रस्तुति दी गई। जिससे सारा मंदिर परिसर भक्तिरस में झूम उठा। भजनों में आज मेरी मैया ने औणा है, जय देवा कमरुनागा हो, आया लोडी मंडी मेले जो,ऊंचे पहाड़ा लाया डेरा ओ शेरावालिए, और सेहली धारा री भगवती ये, करी लेने दर्शन तेरे माईये जैसे भक्ति गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
पुजारी अमरजीत शर्मा ने बताया कि रात 12 बजे माता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ जाग का आयोजन आरंभ हुआ। इस जाग का विशेष धार्मिक महत्व है। जाग के दौरान देवताओं और डायनियों के मध्य हुए युद्ध की कथा भी सुनाई गई। जिसमें गुरु ने देववाणी के माध्यम से बताया कि देवता आषाढ माह की शैण देवी एकादशी को युद्ध के लिए प्रस्थान करते हैं और इसका निर्णायक युद्ध भाद्रपद माह में होता है। पहला युद्ध समुद्र के टापू पर तथा अंतिम युद्ध 'घोषर धार' नामक स्थान पर होता है। इस युद्ध में कुल सात बार देवताओं और डायनियों के बीच मुठभेड़ हुई। इनमें से तीन बार देवता विजयी रहे और चार बार डायनियां। अंतिम युद्ध में डायनियां ‘शिख-पाथा’ लेकर चली गईं, जिसके कारण इस वर्ष उन्हें विजयी माना गया।
डायनियों की विजय को भविष्य के लिए चेतावनी माना जा रहा है। इससे जनमानस को भूकंप, बाढ़, अकाल मृत्यु, दुर्घटना जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। माता ने गुरु के माध्यम से अपने भक्तों को आश्वस्त किया कि वह उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी। माता ने यह चेतावनी भी दी कि मनुष्य प्रकृति और देवनीति के साथ छेड़छाड़ कर रहा है, जिससे ये आपदाएं बढ़ रही हैं। यदि अब भी नहीं चेते, तो भविष्य में और भी भयावह परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देव स्थलों को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है, जो देवनीति के विरुद्ध है। देवता शांत, स्वच्छ और पवित्र स्थानों में वास करते हैं।
मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में एक प्रमुख देवी हैं, जो कलियुग में तुरंत प्रभाव देने वाली देवी मानी जाती हैं। वह सदैव अपने भक्तों का कल्याण करती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

