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पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति ने स्पीकर कुलदीप पठानिया से की मुलाकात

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पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति ने स्पीकर कुलदीप पठानिया से की मुलाकात


शिमला, 03 मार्च (हि.स.)। पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुँची और विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से शिष्टाचार भेंट की। यह समिति दो दिवसीय अध्ययन प्रवास पर हिमाचल आई हुई है और सोमवार को शिमला पहुँची थी।

समिति के सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी दौस के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल में डॉ. जसबीर सिंह संधू, नरेश कटारिया और सरदार रनबीर सिंह शामिल रहे। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सभी सदस्यों का हिमाचली टोपी और शॉल पहनाकर स्वागत और सम्मान किया। इस दौरान विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा भी मौजूद रहे।

भेंट के दौरान कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय पंजाब विधानसभा के सत्र भी शिमला स्थित इसी सदन में आयोजित किए जाते थे, जो दोनों राज्यों के ऐतिहासिक रिश्तों को दर्शाता है।

इस अवसर पर समिति के सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी ने पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति की कार्यप्रणाली और गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पंजाब विधानसभा वर्तमान में राष्ट्रीय ई-विधान प्रणाली को अपनाकर काम कर रही है और इसके अनुभव भी साझा किए।

बैठक के बाद विधानसभा अध्यक्ष स्वयं समिति के सदस्यों को सदन और काउंसिल चैम्बर दिखाने ले गए। उन्होंने भवन के इतिहास और गरिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि काउंसिल चैम्बर भवन राष्ट्रीय धरोहर है। इसका निर्माण वर्ष 1920 में शुरू हुआ था और 1925 में पूरा हुआ। उस समय इसकी लागत लगभग 10 लाख रुपये आई थी।

पठानिया ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि वर्ष 1925 में विट्ठल भाई पटेल केंद्रीय विधानसभा के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने थे और उन्होंने अपने अंग्रेज प्रतिद्वंद्वी को दो मतों से हराया था। उन्होंने यह भी कहा कि विट्ठल भाई पटेल, सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई और पेशे से बैरिस्टर थे। उस दौर में केंद्रीय विधानसभा में कुल 145 सदस्य थे, जबकि वर्ष 1919 में फ्रेडरिक व्हाइट को पहला मनोनीत अध्यक्ष बनाया गया था।

विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ और महिलाओं को मताधिकार देने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी इसी सदन में पारित किए गए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में बर्मा सरकार द्वारा ब्रिटिश सरकार को भेंट की गई सागौन (टीक) की ऐतिहासिक कुर्सी आज भी अध्यक्ष के आसन के रूप में उपयोग में है।

पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ई-विधान प्रणाली अपनाने वाला देश का पहला राज्य रहा है और अब तक करीब 22 राज्य इसका अनुसरण कर चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया संसद के अध्यक्ष भी इस प्रणाली को समझने के लिए हिमाचल विधानसभा का दौरा कर चुके हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा