हिमाचल में पंचायत स्तर पर तैयार होगी ‘आपदा मित्र’ फौज, मॉनसून से पहले युवाओं की ट्रेनिंग शुरू
शिमला, 24 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के आगमन से पहले राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। पिछले कुछ वर्षों में भूस्खलन, बादल फटने और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं से हुए भारी नुकसान को देखते हुए अब सरकार पंचायत स्तर पर ‘आपदा मित्र’ तैनात करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत युवाओं को प्रशिक्षित कर एक स्थानीय टास्क फोर्स तैयार की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बुधवार को कहा है कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आपदा मित्रों की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है और इन्हें आपदा के दौरान लोगों की मदद, प्राथमिक राहत, बचाव कार्य और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर पंचायत में ऐसे प्रशिक्षित स्वयंसेवक उपलब्ध हों, जो किसी भी संकट की स्थिति में शुरुआती घंटों में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने कहा कि पंचायत घरों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जरूरी उपकरण रखने की तैयारी भी की जा रही है। इसके अलावा आपदा मित्रों को भी आवश्यक सुरक्षा और रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं की मौजूदगी से आपदा के समय लोगों तक सहायता तेजी से पहुंच सकेगी।
राजस्व मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। इसी कारण लोगों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में मॉक ड्रिल आयोजित कर लोगों को यह बताया गया है कि आपदा आने पर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और किस तरह सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन को लेकर कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं और जिला प्रशासन लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहा है।
सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत निजी कंपनियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि आपदा की स्थिति में सभी एजेंसियां मिलकर काम कर सकें। प्रदेश में राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें भी तैनात की जा रही हैं। शिमला के ढली स्थित एपीएमसी भवन में एनडीआरएफ की टीमों को रखा जाएगा, जबकि एसडीआरएफ की टीमें प्रदेश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहेंगी।
इस बीच किन्नौर जिले में हाल में हुई घटनाओं पर भी सरकार नजर बनाए हुए है। निचार क्षेत्र में आई फ्लैश फ्लड से एक जल परियोजना को नुकसान पहुंचा है और स्कूल आने-जाने का मार्ग भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन प्रभावित रास्ते को बहाल करने में जुटा है। वहीं उरनी क्षेत्र में मंगलवार सुबह लोहे का एक पुल अचानक टूट गया। राजस्व मंत्री ने कहा कि पहले से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के कारण यातायात लंबे समय तक प्रभावित नहीं हुआ, लेकिन पुल गिरने से इलाके में चल रहे निर्माण कार्यों और इस मार्ग का उपयोग करने वाले सेना के वाहनों पर असर पड़ा है। वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही संभव है, हालांकि इससे यात्रियों को करीब एक से डेढ़ घंटे अतिरिक्त समय लग सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

