home page

मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का किया शुभारंभ

 | 
मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का किया शुभारंभ


मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का किया शुभारंभ


मंडी, 17 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिसके तहत वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का मंडी के पड्डल मैदान से शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े के विस्तार के लिए नई 297 टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की है। नई इलेक्ट्रिक बसें वर्तमान में शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला तथा नगरोटा में संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में भी आवश्यक चार्जिंग अवसंरचना विकसित की जा चुकी है तथा इन क्षेत्रों में नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का संचालन भी आज से शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर लगभग 180 किलोमीटर है। परिचालन के दौरान इन बसों का प्रदर्शन अत्यंत उत्साहजनक रहा है। उन्होंने कहा कि शिमलादृचंडीगढ़ मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस द्वारा एक बार चार्ज करने पर लगभग 270 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की जा रही है। यह प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश के चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भू-भाग में लंबी दूरी के अंतर-शहरी मार्गों पर इन बसों की उपयोगिता को प्रदर्शित करता है।

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से एचआरटीसी की परिचालन लागत में भी महत्वपूर्ण कमी आ रही है। पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से ऊर्जा लागत में लगभग 12-13 रूपए प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे निगम के ईंधन एवं परिचालन व्यय में कमी आने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की समग्र दक्षता में भी सुधार हो रहा है।

ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी को बसें खरीद कर देती है और हर साल अनुदान के रूप में 840 करोड़ रूपए सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं। इतनी ही कमाई एचआरटीसी अपने संसाधनांें से भी कर रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा