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सीपीआरआई शिमला में 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह से मनाया, मेधावी बच्चों को किया सम्मानित

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सीपीआरआई शिमला में 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह से मनाया, मेधावी बच्चों को किया सम्मानित


शिमला, 15 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला में शनिवार को 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और राष्ट्र निर्माण में सभी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

अपने संबोधन में डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय गौरव का पर्व नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद करने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्थानों की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा, किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में कृषि विज्ञान की बड़ी भूमिका है।

उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत कार्यरत सीपीआरआई आलू उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने तथा किसानों की आय में सुधार के लिए लगातार अनुसंधान और तकनीकी विकास का काम कर रहा है।

उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से नवाचार, समर्पण और टीम भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। डॉ. सिंह ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में वैज्ञानिक संस्थानों का योगदान अहम है और इस दिशा में सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

निदेशक ने युवा पीढ़ी को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं में देशभक्ति, वैज्ञानिक सोच, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यही युवा देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संस्थान के मेधावी बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद बच्चों के लिए “स्वतंत्रता का सम्मान, भविष्य को प्रेरणा” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। साथ ही देशभक्ति पर आधारित कविता पाठ, गीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। इन गतिविधियों में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा