माता भीमा काली मंदिर में धार्मिक प्रतियोगिता का आयोजन, भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की अनूठी पहल
मंडी, 18 जनवरी (हि.स.)। मंडी के ऐतिहासिक माता भीमा काली मंदिर परिसर में रविवार को स्वर्गीय अभिनव बावा की पुण्य स्मृति में एक भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को मंडी की समृद्ध विरासत, इतिहास और गौरवशाली संस्कृति से रूबरू करवाना था। इस प्रतियोगिता में मंडी शहर और आसपास के लगभग 11 स्कूलों के 242 विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यद्यपि प्रतिवर्ष इस आयोजन में 500 से अधिक बच्चे सम्मिलित होते हैं, परंतु इस वर्ष अत्यधिक ठंड के प्रकोप के कारण संख्या में कुछ कमी देखी गई, इसके बावजूद बच्चों के जोश और जज्बे में कोई कमी नहीं थी। प्रतियोगिता को कनिष्ठ (जूनियर) और वरिष्ठ (सीनियर) दो वर्गों में विभाजित किया गया था, जिसमें मंडी की संस्कृति, स्थानीय इतिहास और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित दो घंटे की लिखित सामान्य ज्ञान परीक्षा आयोजित की गई।
मंदिर संचालन समिति के संचालक तारकेंद्र वैद्य ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज के आधुनिक युग में बच्चे अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में इस तरह के आयोजन उन्हें अपने गौरवशाली अतीत और परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं। इस विशेष अवसर पर मंदिर कमेटी की ओर से पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष पुष्पराज शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। आयोजकों द्वारा सभी सहभागी बच्चों को प्रोत्साहन स्वरूप कार्ड बोर्ड, माता भीमा काली का स्मृति चित्र और एक विशेष सिक्का भेंट किया गया। आयोजन की खास बात यह रही कि आयोजक टारना गैस एजेंसी की संचालक सीमा बावा और उनकी सुपुत्री आभा बावा द्वारा न केवल प्रतियोगिता का सफल प्रबंधन किया गया, बल्कि दिवंगत अभिनव बावा की याद में उपस्थित सभी लोगों के लिए पारंपरिक मंडयाली धाम का भी विशेष आयोजन किया गया, जो स्थानीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा और विजेताओं को पुरस्कृत करने का भव्य समारोह आगामी 15 अप्रैल को प्रसिद्ध भ्यूली मेले के दौरान आयोजित किया जाएगा, जहां मेधावी छात्रों को उनकी विशिष्ट प्रतिभा के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता मात्र है, बल्कि यह समुदाय को एक सूत्र में पिरोने और नई पीढ़ी के भीतर अपनी मिट्टी के प्रति सम्मान जगाने का एक अत्यंत सराहनीय प्रयास बनकर उभरा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

