home page

हिसार : प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएं तैयार करें : मनोज रोज

 | 
हिसार : प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएं तैयार करें : मनोज रोज


लुवास में 38वें

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद उन्नत संकाय प्रशिक्षण केंद्र का प्रशिक्षण सम्पन्न

हिसार, 27 फरवरी

(हि.स.)। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के पशु

चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग में चल रहा 38वां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद उन्नत

संकाय प्रशिक्षण केंद्र का 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। इस 21 दिवसीय

पाठ्यक्रम के दौरान देश के सात राज्यों से आए 16 वैज्ञानिकों को ‘पशु रोगों के निदान

और नियंत्रण में नवीन प्रगति’ विषय पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

समापन अवसर पर मुख्य

अतिथि पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार रोज़ ने शुक्रवार काे सूक्ष्म जीव विज्ञान

एवं प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान उन्नयन के लिए विभाग की सराहना

की तथा प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर

सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएं तैयार करें। उन्होंने कहा कि भारत को पशुओं में होने

वाली बीमारियों के नवीन निदान, उपचार तथा संभावित रोग प्रकोप से पूर्व तैयारी की दिशा

में सुदृढ़ व्यवस्था विकसित करनी होगी।

इस अवसर पर मुख्य

अतिथि ने पाठ्यक्रम से संबंधित ई-व्याख्यान तथा सहायक अध्ययन सामग्री का विमोचन भी

किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने प्रतिभागियों

को प्रमाण-पत्र वितरित किए।

विभागाध्यक्ष एवं

पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. राजेश छाबड़ा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा विभिन्न पशु रोगों की पहचान एवं नियंत्रण

से संबंधित आधुनिक तकनीकों पर व्याख्यान तथा व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

इस दौरान देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों, जैसे यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया

(कनाडा), महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक, स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, रोहतक

तथा एग्री इनोवेट इंडिया लिमिटेड (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की वाणिज्यिक इकाई) के

वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। व्याख्यानों में जीन संपादन प्रणाली, जैव

संवेदक, संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण, जैविक सामग्री से संबंधित स्वामित्व अधिकार, बौद्धिक

संपदा अधिकार, एक स्वास्थ्य अवधारणा तथा जन्तुजन्य रोगों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर

विस्तार से चर्चा की गई।

पाठ्यक्रम संयोजक

डॉ. अखिल कुमार गुप्ता एवं डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित किया गया। अंत में डॉ. महावीर

सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। समारोह में विश्वविद्यालय के अनेक अधिकारी

उपस्थित रहे, जिनमें निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. गौतम, वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार कक्कड़,

डॉ. स्वाति दहिया, डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. संजीवना, डॉ. अनीता दलाल सहित विभाग के विद्यार्थी

भी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर