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हिसार : किसान को बेचारा समझने की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत: पद्मश्री सेठपाल सिंह

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हिसार : किसान को बेचारा समझने की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत: पद्मश्री सेठपाल सिंह


हिसार में दो दिवसीय कृषि उद्यमिता विकास कार्यशाला शुरू, पांच राज्यों के

100 प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

हिसार, 03 नवंबर (हि.स.)। किसान देश की आन-बान और शान हैं, लेकिन दुर्भाग्य

से हमने कृषि व्यवसाय की गरिमा को समझने में बड़ी नादानी की है। विकसित भारत का लक्ष्य

हासिल करने के लिए किसान को बेचारा समझने की मानसिकता से स्वयं किसान और समाज को बाहर

निकलना होगा। दुनिया में भारतीय किसानों के लिए सबसे बड़ा बाजार उपलब्ध है, लेकिन किसान

सरकारी बैसाखी के सहारे की राह देखते हैं।

यह बात पद्मश्री सेठपाल सिंह ने मंगलवार को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के

सायना नेहवाल कृषि तकनीकी प्रशिक्षण एवं विस्तार शिक्षा संस्थान में दो दिवसीय कृषि

उद्यमिता विकास कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही। विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली और

ग्रामीण विकास मंडल दादरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में पांच राज्यों

के करीब 100 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। सेठपाल सिंह ने कहा कि भारत की मिट्टी, जलवायु और मौसम की विविधता किसानों

के लिए वरदान है, लेकिन हमने इसे अभिशाप समझ लिया है। कृषि में विविधता अपनाकर किसान

अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इसके लिए खेती को केवल परंपरागत व्यवसाय के

रूप में देखने के बजाय उद्यमिता और बाजार की संभावनाओं से जोड़ना होगा।

कार्यशाला में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ग्रामीण विकास मंडल दादरी के

अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने कहा कि पांच राज्यों से आए उन महानुभावों का अभिनंदन करना

सौभाग्य की बात है, जो खेती को सम्मान दिलाने के लिए खेत से लेकर प्रयोगशाला तक सक्रिय

हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास मंडल वर्ष 1980 से सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र

में सक्रिय स्वैच्छिक संगठन है। मंडल नाबार्ड, विश्व युवक केंद्र और स्थानीय समुदाय

के सहयोग से स्वैच्छिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रशिक्षण डॉ. अशोक

कुमार गोदारा ने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय पिछले पांच दशकों से युवाओं को

कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दक्षता प्रदान कर रहा है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य छोटे

से छोटे किसान के साधारण नवाचार को भी गति देना है, ताकि उपयोगी कृषि तकनीकों और प्रयोगों

को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके। इससे पहले विषय प्रवेश करवाते हुए विश्व युवक केंद्र के वरिष्ठ प्रोग्राम ऑफिसर

रजत थॉमस ने बताया कि उनका संस्थान दिल्ली से देशभर में कृषि, स्वरोजगार, पर्यावरण

और युवा सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर