विकास कार्यों में तीन करोड़ के घोटाले के आरोप, जांच के दौरान सरपंच घर से गायब
पानीपत, 28 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा के पानीपत के गांव मनाना में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। विजिलेंस को भेजी गई शिकायत में गांव की सरपंच रेखा देवी, ग्राम सचिव शहजाद अली, एसडीओ कमल और जेई अमन कुमार पर पिछले पांच महीनों में करीब तीन करोड़ रुपये की राशि में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं।इन आरोपों की जांच-पड़ताल करने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम शुक्रवार को बीडीपीओ कार्यालय पहुंची, जहां से उन्होंने गांव के विकास कार्यों का रिकॉर्ड जुटाया। बताया जा रहा है कि सरपंच रेखा को जांच की भनक लगते ही वह अपने पति के साथ घर से कहीं चली गई।शिकायतकर्ता संदीप राठी व धर्मपाल ने बताया कि एंटी क्रप्शन ब्यूरो के अधिकारियों को सभी सबूतों सहित दस्तावेज साैंप दिए गए हैं। उनके अनुसार, दस्तावेजाें के प्रारम्भिक जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितता आई हैं। मौके पर ही ग्राम सचिव शहजाद अली को रिकॉर्ड में कटिंग व छेड़छाड़ करने के कारण फटकार लगाते हुए कहा कि आपने अपनी ड्यूटी को सही ढंग से नहीं निभाया है। ग्राम सचिव ने अपनी गलती को मानते हुए अधिकारियों को बताया कि उसके द्वारा जो पेमेंट फर्मों को की गई है, वह उन पर दबाव डालकर करवाई गई।शिकायत में उल्लेख है कि जेई अमन कुमार ने स्वयं उच्च अधिकारियों को लिखकर अवगत कराया था कि सरपंच के पति प्रवीण कुमार ठेकेदारों से पेमेंट रोकने की एवज में कमीशन मांगता है। साथ ही एक ऑडियो क्लिप का भी हवाला दिया गया है, जिसमें घटिया निर्माण सामग्री को पास करने के लिए अधिकारियों को 'मोटा कमीशन' देने की बात कही जा रही है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना तकनीकी हस्ताक्षर के दिसंबर 2023 को दो लाख 85 हजार 775 रुपए का भुगतान किया गया, जिस पर तकनीकी शाखा के कोई हस्ताक्षर नहीं हैं। वाउचर नं, पी 15,16 के माध्यम से पांच लाख 93 हजार 488 रुपए की अदायगी बिना किसी बिल के कर दी गई तथा वाउचर नंबर पी-32 में बिल की राशि चार लाख40 हजार 751 रूपये थी, लेकिन सरपंच द्वारा पांच लाख 47 हजार 95 रुपए का भुगतान किया गया।शिकायतकर्ताओं का आराेप है कि निशानदेही के काम में जहां मात्र ₹20 हजार रुपए खर्च होने थे, वहां सरपंच ने अधिकारियों से सांठगांठ कर लाखों रुपए का चूना लगाया। इसके अलावा गांव के जोहड़ स्थित ट्यूबवेल पर मोटर और अन्य सामान के नाम पर भी घोटाला किया गया। आरोप है कि पंचायत के प्रस्ताव के विरुद्ध जाकर सरपंच ने अपनी मर्जी से भुगतान किए।ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच राज्य सतर्कता और एंटी करप्शन ब्यूरो के साथ-साथ सीआईए से करवाई जाए।सूत्रों के अनुसार, जांच को बाधित करने के लिए सरपंच रेखा देवी व पति जांच से पहले ही घर से जा चुके थे, जिस कारण काफी इंतजार करने के बाद एंटी क्रप्शन ब्यूरो की टीम को बैरंग लौटना पड़ा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा

