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नियमितीकरण के मामलों में हरियाणा सरकार की कानूनी तैयारी तेज

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विभागों को हाई कोर्ट में अपील दाखिल करने के निर्देश

चंडीगढ़, 26 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा में कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े अदालती मामलों में सरकार ने कानूनी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। मानव संसाधन विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर कहा है कि नियमितीकरण से जुड़े मामलों में अदालतों के फैसलों की समीक्षा कर आवश्यक कानूनी कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाएं। जहां उचित कानूनी आधार हो, वहां फैसलों को चुनौती देने के लिए लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) दाखिल की जाए। जरूरत पडऩे पर अदालत से संबंधित फैसलों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लेने की मांग भी की जाए। जारी इस पत्र में विभागों को स्पष्ट किया गया है कि नियमितीकरण से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया को लंबित न रखा जाए। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, लागू नियमितीकरण नीतियों, मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने संबंधित विधि अधिकारियों और सक्षम प्राधिकारियों से परामर्श लेकर अदालतों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा है।

मानव संसाधन विभाग ने यह पत्र प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और सरकारी बोर्डों तथा निगमों के प्रबंध निदेशकों को भेजा है। इससे नियमितीकरण से संबंधित मामलों की समीक्षा का दायरा विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों तक पहुंच गया है। पत्र में कहा गया है कि संबंधित विभाग अपने स्तर पर लंबित मामलों की स्थिति का आकलन करें। जहां अदालत के फैसले को चुनौती देने का कानूनी आधार उपलब्ध हो, वहां सक्षम प्राधिकारी और विधि अधिकारी से सलाह लेकर अपील की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके साथ ही, जरूरत के अनुसार अदालत से अंतरिम राहत प्राप्त करने के विकल्प पर भी कार्रवाई की जाए।

सरकार ने विभागों को केवल औपचारिक जवाब दाखिल करने के बजाय अदालत के सामने पूरा तथ्यात्मक और कानूनी पक्ष रखने पर जोर दिया है। संबंधित कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, नियमितीकरण से जुड़ी नीतियों और मामले के कानूनी आधारों की जांच के बाद ही आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। इससे प्रत्येक मामले में विभागीय रिकॉर्ड और लागू नियमों की अहमियत बढ़ गई है। अपील दाखिल करने का निर्णय संबंधित मामले के तथ्यों और उपलब्ध कानूनी आधारों के अनुसार लिया जाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा